
एक ही केस में फंस गया लालू का आधा परिवार, सजा हुई तो RJD की राजनीति में आगे कौन?
चारा घोटाले के सजायाफ्ता लालू यादव का लगभग आधा परिवार एक ही केस में फंस गया है। दिल्ली में स्पेशल कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब केस में लालू-राबड़ी समेत दोनों बेटे तेजस्वी और तेज प्रताप तथा दो बेटियों मीसा और हेमा पर आरोप तय कर दिया है।
देश के रेल मंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव खुद तो चारा घोटाला में जेल गए ही, अब उनके आधे परिवार पर जेल जाने का खतरा बढ़ गया है। दिल्ली की स्पेशल कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब केस में लालू की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, दोनों बेटे पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव, दो बेटियों सांसद मीसा भारती और हेमा यादव पर मुकदमा का ट्रायल चलाने के लिए आरोप गठन कर दिया है। लालू पर रेल मंत्री रहते परिवार के लोगों के नाम पर जमीन लिखवाकर ग्रुप डी की नौकरी देने का आरोप है। सीबीआई ने 2022 में इस केस में एक प्राथमिकी दर्ज की थी। कोर्ट ने 103 आरोपियों में 52 को बरी कर दिया जबकि पांच की इस दौरान मौत हो चुकी है। लालू-राबड़ी परिवार के छह सदस्यों समेत 46 आरोपी ट्रायल का सामना करेंगे।
कोर्ट ने लालू-राबड़ी के दोनों बेटों और दो बेटियों पर 120बी, 420 और भ्रष्टाचार निवारण कानून की धारा 13(2), 13 (1) (डी) के तहत चार्ज फ्रेम किया है। आरोप साबित हुए तो परिवार के लोग ना सिर्फ जेल जाएंगे, बल्कि एक समय तक चुनाव लड़ने से भी अयोग्य हो जाएंगे। लालू की राजद की राजनीति इस समय तेजस्वी यादव के हाथों में है। तेज प्रताप यादव परिवार से बाहर हैं और वो अपनी पार्टी जेजेडी बना चुके हैं। मीसा भारती लोकसभा सांसद हैं। राबड़ी विधान परिषद सदस्य हैं। हेमा यादव राजनीति में नहीं हैं।
भारतीय कानून के मुताबिक यदि किसी को 2 साल या उससे अधिक की सजा हो गई है तो उससे संसदीय या विधायी पद छीन लिया जाता है और उसे सजा काटने के आगे 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ने दिया जाता है। लालू परिवार के चार बच्चे राजनीति में हैं, जिसमें रोहिणी आचार्या के अलावा तीन नौकरी के बदले जमीन लिखवाने के मामले में ट्रायल स्टेज तक पहुंच गए हैं। अब अदालत में सबूत, गवाही और बहस के बाद इस केस में आरोपियों को या तो सजा होगी या रिहाई। मामले की स्पीडी ट्रायल की गुंजाइश भी है, जिससे केस के फैसले में बहुत लंबा समय नहीं लगेगा। आरोप में जो धाराएं हैं, उनमें 2 साल से ऊपर की सजा का प्रावधान है।
ऐसे में अगर कोर्ट ने लालू परिवार के खिलाफ लगे आरोपों को ट्रायल में सही मानकर उन्हें दोषी ठहराया और सजा सुना दी तो लालू की पार्टी राजद के भविष्य की राजनीति पर भी गंभीर सवाल पैदा हो जाएगा। सजा मिलने पर लालू-राबड़ी परिवार की दूसरी पीढ़ी से तेजस्वी यादव, तेज प्रताप और मीसा भारती सजा काटने के 6 साल बाद तक चुनाव लड़ने लायक भी नहीं रहेंगे। राजद की राजनीति चाहे-अनचाहे लालू परिवार में रोहिणी आचार्या, तेजस्वी की पत्नी राजश्री यादव या किसी और बेटी के हाथ जा सकती है। पार्टी का कोई और नेता भी उभारा जा सकता है। राजद का यह संकट भविष्य की बात है, लेकिन आरोप गठन ने लालू खानदान और उनकी पारिवारिक राजनीति को एक साथ कटघरे में खड़ा कर दिया है।





