कौन थे बाबा फतेह सिंह, बख्तियारपुर का नाम 'फतेह विहार’ करने का प्रस्ताव; मुगलों ने दीवार में चुनवाया था
बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग पिछले कई बरसों से हो रही है। बख्तियारपुर नगर परिषद ने अब बख्तियारपुर के नए नाम का प्रस्ताव बिहार सरकार को भेजा है। बख्तियारपुर का नाम बाबा फतेह सिंह के नाम पर रखने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

बख्तियारपुर का नाम बदलने की चर्चा ने पिछले कुछ दिनों से जोर पकड़ी है। हाल ही में बख्तियारपुर नगर परिषद ने शहर का नाम बदलने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। स्थानीय लोगों ने नाम बदलने को लेकर धरना भी दिया था। अब बख्तियारपुर का नाम बाबा फतेह सिंह की स्मृति में ‘फतेह विहार’ करने की मांग ने चर्चा को नया आयाम दिया है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि शहर का नाम किसी विदेशी आक्रमणकारी की जगह वीर बालक के नाम के नाम पर रहने से लोग प्रेरित होंगे।
कौन थे बाबा फतेह सिंह
बाबा फतेह सिंह, सिखों के दसवें गुरु, श्री गोबिंद सिंह जी के सबसे छोटे पुत्र थे। धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर मुगल शासक ने बाबा फतेह सिंह और उनके भाई जोरावर सिंह को छोटी उम्र में सरहिंद में दीवार में चुनवा दिया गया था। उनकी स्मृति में हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है। सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता और इतिहासविद डॉ. रामबिनोद सिंह का मानना है कि आज भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय नायकों और प्रेरणादायक महापुरुषों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में सार्वजनिक स्थलों एवं नगरों के नाम भी ऐसे प्रेरक व्यक्तित्वों के नाम पर हों।
उन्होंने कहा कि बख्तियारपुर का नाम मोहम्मद बख्तियार खिलजी जैसे क्रूर और बर्बर आक्रांता से जुड़ा है। उसने बिहार और बंगाल के अनेक नगरों, गांवों, मठों तथा शिक्षा केंद्रों को भारी क्षति पहुंचाई। विशेष रूप से नालंदा, उदंतपुरी और विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात ज्ञान एवं शिक्षा केंद्रों के विनाश का उल्लेख इतिहास में मिलता है। डॉ. सिंह ने कहा कि बिहार दसवें सिख गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की जन्मस्थली है। पटना साहिब में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के जन्मस्थान के दर्शन के लिए देश-विदेश से आने वाले अधिकांश श्रद्धालु राजगीर स्थित श्री गुरु नानक शीतल कुंड साहिब जाने के क्रम में बख्तियारपुर से होकर गुजरते हैं। यदि बख्तियारपुर का नाम ‘फतेह विहार’ रखा जाता है, तो यह नगर सिख आस्था और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनेगा। इससे धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
गौर हो कि नगर परिषद ने बख्तियारपुर का नाम ‘मगध द्वार’ करने का प्रस्ताव बिहार सरकार को भेजा है। दूसरी तरफ, कई लोगों की मांग है कि नामकरण स्वतंत्रता सेनानी पंडित शीलभद्र याजी नगर किया जाए। इतिहासविद, डॉ. राम विनोद सिंह ने कहा कि यह सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं होगा। भारतीय संस्कृति, बलिदान, राष्ट्रीय स्वाभिमान और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी होगा।


