कौन हैं संजीव चौरसिया, जिन्हें बिहार विधानसभा में बनाया गया मुख्य सचेतक; सीएम की रेस में चल रहा था नाम
संजीव चौरसिया पटना की दीघा सीट से भाजपा के तीन बार के विधायक हैं। संगठन में उनकी अच्छी पकड़ है। उनका नाम पहले मुख्यमंत्री पद की रेस में चल रहा था। सम्राट चौधरी के सीएम बनने के बाद उन्हें अब बिहार विधानसभा में मुख्य सचेतक बनाया गया है।

बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए की नई सरकार में संजीव चौरसिया को विधानसभा में मुख्य सचेतक बनाया गया है। चौरसिया पटना के दीघा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक हैं। उनके पास संगठन का लंबा अनुभव है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने जब मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान किया था, उसके बाद भाजपा के संभावित सीएम चेहरे में चौरसिया का भी नाम चल रहा था। अब उन्हें मुख्य सचेतक का पद दिया गया है।
इसके साथ ही बरौली से जेडीयू के विधायक मंजीत कुमार सिंह को विधानसभा में उप मुख्य सचेतक बनाया गया है। वहीं, गायत्री देवी, राजू तिवारी, रामविलास कामत, सुधांशु शेखर, राणा रणधीर, विनय कुमार चौधरी, कृष्ण कुमार ऋषि, अरुण मांझी और रत्नेश कुमार सदा को सचेतक की जिम्मेदारी मिली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को इनके मनोनयन का आदेश जारी किया।
संजीव चौरसिया कौन हैं?
बिहार विधानसभा में मुख्य सचेतक बनाए गए संजीव चौरसिया प्रदेश में भाजपा के बड़े नेता हैं। वह अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं और प्रदेश में भाजपा का वैश्य चेहरा हैं। उनके पिता गंगा प्रसाद चौरसिया सिक्किम के राज्यपाल रहे थे।
संजीव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि से आते हैं और छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े रहे। संजीव चौरसिया पटना के दीघा से तीन बार के विधायक हैं। बिहार में भाजपा के संगठन को मजबूती देने में उनका अहम योगदान रहा है। संजीव विवादों से दूर रहते हैं और संगठन में उनकी स्वीकार्यता और पकड़ भी अच्छी है। वह लो प्रोफाइल रहकर अपने काम को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए जाने जाते हैं।
बिहार
सीएम की रेस में चल रहा था नाम
बीते मार्च महीने में जब नीतीश कुमार ने सीएम पद छोड़ने का ऐलान किया और बिहार में भाजपा के नए सीएम के नामों की अटकलें चलने लगीं। तब नए मुख्यमंत्री की रेस में संजीव चौरसिया का नाम भी खूब चला था। हालांकि, बाद में भाजपा ने नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम रहे सम्राट चौधरी को राज्य की कमान सौंपी।
मुख्य सचेतक का क्या काम होता है?
विधानसभा के अंदर अपने दल या गठबंधन के विधायकों की उपस्थिति, अनुशासन को सुनिश्चित करने का काम मुख्य सचेतक का होता है। सदन के अंदर दल या गठबंधन की रणनीति संभालने की जिम्मेदारी इनके पास होती है। जब कोई महत्वपूर्ण विधेयक या प्रस्ताव सदन में लाया जाता है, तो मुख्य सचेतक अपने पक्ष के सभी सदस्यों को व्हिप जारी करते हैं और उन्हें सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहते हैं। मुख्य सचेतक को आमतौर पर राज्यमंत्री का दर्जा दिया जाता है। उन्हें उसी तरह की वेतन, भत्ते आदि सुविधाएं मिलती हैं।
लेखक के बारे में
Jayesh Jetawatजयेश जेतावत एक अनुभवी, जुझारू एवं निष्पक्ष पत्रकार हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग एवं संपादन में महारत हासिल है। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। तकनीकी रूप से निपुण जयेश, तथ्यों की बारीकी से जांच कर समयसीमा के भीतर पाठकों तक सटीक खबरें एवं शोध-परक विश्लेषण पहुंचाते हैं। जनसरोकार के मुद्दे उठाना, पेशेवर नैतिकता का पालन करना, समाज एवं मानव कल्याण के प्रति जिम्मेदारी, इन्हें और भी योग्य बनाती है। भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ है। जटिल मुद्दों को पाठकों एवं दर्शकों तक आसान शब्दों में पहुंचाना इनकी खूबी है।
जयेश जेतावत मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद ईटीवी भारत में बतौर प्रशिक्षु समाचार संपादक के रूप में काम शुरू किया। फिर इंडिया न्यूज के डिजिटल सेक्शन में विभिन्न बीट कवर की। इसके बाद, वे2न्यूज में बतौर टीम लीडर तीन राज्यों की कमान संभाली। साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े, तब से यहां बिहार की खबरों को कवर कर रहे हैं। जयेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव इंडिया न्यूज चैनल और सी-वोटर रिसर्च एजेंसी में इंटर्नशिप भी की। पटना से प्रकाशित मैगजीन राइजिंग मगध में समसामयिक विषयों पर इनके लेख छपते रहे हैं। समाचार लेखन के अलावा जयेश की साहित्यिक पठन एवं लेखन में रुचि है, सामाजिक मुद्दों पर कई लघु कथाएं लिख चुके हैं।


