कौन हैं लालू यादव के चहेते रीतलाल यादव? तीसरी बार लड़ रहे हैं जेल से चुनाव; खौफ खाते हैं लोग
बिहार विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव ने पहला रोडशो किया। दानापुर में उन्होंने रीतलाल यादव के समर्थन में रैली की। रीतलाल यादव रंगदारी के आरोप में जेल में हैं।
बिहार में विधानसभा चुनाव का प्रचार अब चरम पर पहुंच चुका है। 6 नवंबर को पहले चरण की वोटिंग होनी है। वहीं बिहार के दानापुर सीट की बात करें तो यहां एक बार फिर पुराना माहौल नजर आ रहा है।लालू प्रसाद यादव खुद इस सीट पर अपने मनपसंद प्रत्याशी रीतलाल यादव के लिए वोट मांगने पहुंचे। ऐसे में दानापुर विधानसभा के लोगों को पुराना समय भी याद आ रहा है जब बिहार में अपराध चरम पर था। दानापुर सीट पर लालू प्रसाद यादव के रोडशो में उनके साथ बेटी मीसा भारती और तेजस्वी यादव भी मौजूद थे।

जेल से चुनाव लड़ रहे हैं रीतलाल यादव
दानापुर सीट से आरजेडी प्रत्याशी रीतलाल यादव लालू प्रसाद यादव के काफी करीबी माने जाते हैं। वह रंगदारी के आरोप में भागलपुर की जेल में हैं और जेल से ही चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव प्रचार के लिए उन्होंने पटना हाई कोर्ट में जमानत याचिका फाइल की थी जो कि खारिज हो गई। उनपर आरोप है कि उन्होंने कुमार गौरव नाम के बिल्डर से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। पहले वह बेऊर जेल में थे लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें भागलपुर जेल शिफ्ट करना पड़ा। इस बार बीजेपी ने रीतलाल के खिलाफ पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव को उतारा है। रामकृपाल यादव भी लालू यादव के पुराने सहयोगी रहे हैं। इसके आलाव बीजेपी को उम्मीद है कि इससे यादव वोटबैंक रामकृपाल की तरफ शिफ्ट होगा।
रीतलाल यादव पर दर्ज हैं कई मामले
आरजेडी प्रत्याशी रीतलाल की गिनती आपराधिक प्रकृति वाले लोगों में होती है। उनपर कम से कम 40 केस दर्ज हैं। इनमें हत्या, रंगदारी, दंगा भड़काने और आपराधिक साजिश के मामले हैं। यहीं के एक निवासी ने कहा कि जब बीजेपी की आशा सिन्हा यहां से विधायक बनी थीं तो उनके घर के सामने ही पानी भारा रहता था। ऐसे में लोग उनसे निराश हो गए और रीतलाल एक बार फिर चुनाव जीत गएय़
एक व्यापारी ने कहा, रीतलाल के साथी हम लोगों से हफ्ता मांगते हैं। नीतीश सरकार ने काफी अच्छा काम किया हालांकि लोगों के पास अब भी रोजगार की कमी है और उन्हें पलायन करना पड़ता है। बता दें कि रीतलाल 2003 में तब सुर्खियों में आए थे जब उनपर बीजेपी नेता सत्यनारायण सिन्हा और आशा सिन्हा के पति की हत्या के आरोप लगे थे। 2010 में विधानसभा चुनाव से पहले रीतलाल ने सरेंडरकर दिया था। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जेल से ही चुनाव लड़ा और हार गए।
2015 में भी वह जेल में ही थे और निर्दलीय एमएलसी बन गए। चार साल बाद वह जेल से निकले तो 2020 के विधानसभा चुनाव में आशा देवी सिन्हा को हराकर विधायक बन गए। इस साल अप्रैल में 50 लाख की रंगदारी के मामले में रीतलाल ने सरेंडर कर दिया था। वहीं उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले रामकृपाल लोकसभा चुनाव में 2014 और 2020 मे मीसा भारती को हरा चुके हैं। हालांकि 2024 में वह चुनाव हार गए थे। पटना जिले की दानापुर सीट पर 1995 और 2000 में लालू प्रसाद यादव ने चुनाव जीता था। हालांकि राघोपुर के लिए उन्होंने दोनों बार यह सीट छोड़ दी।





