Hindi NewsBihar NewsWhen the leader himself runs away where will the workers survive BJP retorts to Prashant Kishor allegations
जब नेता ही भाग जाएगा, तो कार्यकर्ता कहां टिकेंगे; प्रशांत किशोर के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार

जब नेता ही भाग जाएगा, तो कार्यकर्ता कहां टिकेंगे; प्रशांत किशोर के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार

संक्षेप:

प्रशांत किशोर के भाजपा पर जन सुराज के उम्मीदवारों को बंधक बनान के आरोपर बीजेपी ने पलटवार किया है। मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि जब नेता ही मैदान छोड़ दे, तो उनके कार्यकर्ता कितनी देर मैदान में टिकेंगे। पीके खुद ही चुनाव से पहले ही भाग गए हैं।

Oct 21, 2025 08:33 pm ISTsandeep लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया है कि भाजपा उसके उम्मीदवारों को बंधक बना रही है। दबाव में उन्हें या तो नामांकन नहीं करने दिया जा रहा है या फिर जबरदस्ती नामांकन वापस कराए जा रहे हैं। जिस पर बीजेपी ने पलटवार किया है। पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि जब नेता ही मैदान छोड़ दे, तो उनके कार्यकर्ता कितनी देर मैदान में टिकेंगे। प्रशांत किशोर खुद ही चुनाव से पहले ही भाग गए हैं। इसलिए उनकी पार्टी के उम्मीदवार भी अब मैदान छोड़ रहे हैं।

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उन्होंने आगे कहा कि प्रशांत किशोर किस दबाव में चुनाव नहीं लड़े। उन पर कौन सा दबाव था, उन्हें बताना चाहिए। वह मैदान छोड़ें तो सही, जब उनकी पार्टी के उम्मीदवार मैदान छोड़कर भाग रहे हैं तो वह हम पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेतृत्वकर्ता में क्षमता होती है तो वह चुनाव लड़ता है। नेता मैदान में होता है तो उनके कार्यकर्ताओं में भी उत्साह रहता है। नेता के मैदान छोड़ने से कार्यकर्ता मायूस हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद चुनाव लड़ते हैं, तभी तो पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह रहता है। जब, नेता ही भाग जाएगा तो कार्यकर्ताओं में उत्साह कैसे रहेगा?

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आपको बता दें पीके ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले हार के डर से भाजपा ने दानापुर के जनसुराज उम्मीदवार अखिलेश साह उर्फ मुटूर को दिनभर साथ बैठाकर रखा और नामांकन नहीं करने दिया। इसी तरह ब्रह्मपुर प्रत्याशी डॉ. सत्यदेव तिवारी का नामांकन वापस कराया गया। गोपालगंज से प्रत्याशी डॉ. शशि शेखर सिन्हा को भाजपा के स्थानीय नेता और विधान पार्षद ने दबाव बनाकर उनका नामांकन वापस कराया। उन्होंने कहा कि वाल्मीकिनगर से पहली बार एक शिक्षक को जनसुराज ने टिकट दिया है। वे दो साल पहले इस्तीफा देकर जनसुराज से जुड़े। दो साल से उन्हें सैलरी नहीं मिली है। अब नामांकन के बाद स्थानीय प्रशासन उन पर दबाव बना रहा है कि आपका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। आप चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

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पीके ने आरोप लगाया कि जनसुराज के तीन उम्मीदवारों के नामांकन वापस कराने में भाजपा के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनसुराज के 14 उम्मीदवारों को कई तरह से डराया गया है। तीन लोग टूट गए, लेकिन 240 लोग अब भी हिम्मत के साथ खड़े हैं।