
सीतामढ़ी में HIV के वायरल आंकड़ों का सच क्या ? बिहार एड्स नियंत्रण समिति ने सब क्लियर कर दिया
बिहार के सीतामढ़ी जिले में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या 7 हजार से ज्यादा होने और हर रोज 40-60 नए मरीज मिलने के कई मीडिया रिपोर्ट्स के दावे का सच सामने आ गया है। जिसका जवाब बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति ने दिया है। और इन आंकड़ों को तथ्यहीन और भ्रामक करार दिया है।
बिहार के सीतामढ़ी जिले में एचआईवी मरीजों के जो आंकड़े वायरल हो रहे हैं। वो हैरान करने वाले हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि जिले में 7400 से ज्यादा HIV पॉजिटिव मरीज है। हर दिन 40 से 60 नए मरीज मिल रहे हैं। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है। लेकिन अब इन डराने वाले आंकड़ों का सच सामने आ गया है। बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति ने इन आंकड़ों को भ्रमित और तथ्यहीन बताया है। समिति का कहना है कि जो आंकड़े पेश किए गए हैं। वो वास्तविक स्थिति से बिल्कुल परे हैं।
सीतामढ़ी जिले की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में अक्टूबर तक केवल 200 नए मरीज चिन्हित किए गए हैं। जिले के एंटी रेट्रो वायरल थेरैपी (ART) केंद्र में 4958 मरीज नियमित रूप से एआरवी दवाओं का सेवन कर रहे हैं। 6900 से ज्यादा मरीजों की वर्तमान संख्या बताना पूरी तरह तथ्य से परे है, क्योंकि यह दो दशकों का कुल डेटा है। बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति (BSACS) की ओर से जारी बयान में बताया गया
समिति के अनुसार, सीतामढ़ी ICTC (एचआईवी जांच एवं परामर्श केंद्र) की शुरुआत वर्ष 2005 में और ART (एंटी रेट्रो वायरल थेरैपी) केंद्र की स्थापना 1 दिसंबर 2012 को हुई थी। साल 2005 से अब तक यानी पिछले 20 वर्षों में कुल लगभग 6900 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। इनमें से कई मरीजों की मृत्यु हो चुकी है, कुछ अन्य जिलों में मरीज स्थानांतरित हुए हैं, जबकि कुछ अन्य शहरों में अपना इलाज जारी रखे हुए हैं।
समिति ने यह भी कहा कि प्रतिदिन मरीजों की संख्या बढ़ने’ का दावा भ्रामक है। अस्पतालों में प्रतिदिन वे ही पुराने रजिस्टर्ड मरीज पहुंचते हैं जो अपनी नियमित दवा या परामर्श के लिए आते हैं। बच्चों में संक्रमण के मामले में समिति ने जानकारी दी कि अब तक केवल 188 बच्चे संक्रमित पाए गए हैं और इन सभी का नियमित इलाज चल रहा है। इनके लिए सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
समिति ने इस संवेदनशील विषय पर जिम्मेदार रिपोर्टिंग की अपील करते हुए कहा कि तथ्यहीन खबरें समाज में अनावश्यक भय और भ्रम पैदा करती हैं। मीडिया से अपेक्षा की गई है कि किसी भी समाचार के प्रसारण से पहले विश्वसनीय आंकड़ों की पुष्टि अवश्य करें।





