बिहारी हैं पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी को झाल-मुड़ी खिलाने वाले विक्रम, पिता 40 साल से इसी बिजनेस में

Nishant Nandan हिन्दुस्तान, सुधीर कुमार, गयाजी
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करीब 10 साल पहले विक्रम ने खुद किराये पर दुकान लेकर इस धंधे को आगे बढ़ाया। उनके माता-पिता, पत्नी और बच्चे फिलहाल कोलकाता में रहते हैं, जबकि बड़े भाई शंकर साव परिवार समेत गांव में ही रहते हैं।

बिहारी हैं पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी को झाल-मुड़ी खिलाने वाले विक्रम, पिता 40 साल से इसी बिजनेस में

एक साधारण झालमुड़ी बेचने वाले की जिंदगी उस वक्त बदल गई, जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक उसकी दुकान पर पहुंच गए। कोलकाता में चुनावी सभा के बाद व्यस्त कार्यक्रम के बीच कुछ पल निकालकर पीएम मोदी ने न सिर्फ झाल मुड़ी खाई, बल्कि दुकानदार से हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत भी की। यह दृश्य जैसे ही कैमरे में कैद हुआ, वैसे ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। देखते ही देखते यह खबर राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर तक चर्चा का विषय बन गई। इस एक पल ने गया जिले के टनकुप्पा के रहने वाले विक्रम साव को रातों-रात पहचान दिला दी।

कौन हैं विक्रम साव

विक्रम साव बिहार के गया जिले के टनकुप्पा प्रखंड अंतर्गत चोवार पंचायत के मनमाधो गांव के निवासी हैं। उनके पिता उत्तम साव पिछले करीब 40 वर्षों से कोलकाता में झाल मुड़ी बेचते आ रहे हैं। करीब 10 साल पहले विक्रम ने खुद किराये पर दुकान लेकर इस काम को आगे बढ़ाया। बचपन से ही पिता के साथ इस व्यवसाय को सीखने वाले विक्रम ने अपनी मेहनत और लगन से धीरे-धीरे खुद की पहचान बनाई।

उनका माता-पिता, पत्नी और बच्चे फिलहाल कोलकाता में रहते हैं, जबकि बड़े भाई शंकर साव परिवार समेत गांव में ही रहते हैं। बताया जाता है कि पीएम मोदी ने संवादमें पूछा कितने की झालमुड़ी और फिर 10 रुपये की झाल मुड़ी खरीदी। विक्रम ने पैसे लेने से मना किया, लेकिन पीएम ने अपनी सादगी का परिचय देते हुए भुगतान कर दिया।

मनमाधो गांव में है खुशी की लहर

जैसे ही विक्रम की तस्वीरें टीवी और मोबाइल पर सामने आईं, पहले तो गांव वालों को यकीन नहीं हुआ। लेकिन खबर की पुष्टि होते ही पूरे गांव और आसपास के इलाके में खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। विक्रम के भाई शंकर साव बताते हैं कि वह शुरू से ही मेहनती और सरल स्वभाव का रहा है और संघर्ष के दम पर आज यहां तक पहुंचा है। आज विक्रम साव सिर्फ एक झाल मुड़ी विक्रेता नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो छोटे स्तर से शुरुआत कर बड़े सपने देखते हैं।

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Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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