
श्मशान घाट में लगा दी हर घर नल का जल की टंकी, गांव वाले पानी ही नहीं पी रहे, अब जांच शुरू
सार्वजनिक और सरकारी भूमि उपलब्ध होने के बावजूद ऐसे संवेदनशील स्थल का चयन किया गया। सवाल उठाया जा रहा है कि श्मशान घाट का पानी भला कोई कैसे पी सकता है।
सीएम नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट हर घर नल-जल योजना में भारी लापरवाही का मामला सामने आया है। योजना के तहत शहर से सटे खबड़ा पंचायत के वार्ड संख्या–4 के श्मशान घाट में ही पानी की टंकी खड़ी कर दी गई है। पानी घर-घर पहुंच रहा है, लेकिन लोग उसे पीने या भोजन में उपयोग नहीं कर रहे। हालांकि यह समस्या चार साल पुरानी है, लेकिन इस टंकी पर निर्भर दो हजार की आबादी के सामने गहराते पेयजल संकट को लेकर अब मामला तूल पकड़ने लगा है।
लोगों का सवाल यह है कि वार्ड में ही अन्य सार्वजनिक और सरकारी भूमि उपलब्ध होने के बावजूद ऐसे संवेदनशील स्थल का चयन क्यों किया गया? श्मशान घाट का पानी भला कोई कैसे पी सकता है? आरोप है कि पंचायत और संबंधित विभाग ने स्थानीय लोगों से बिना सहमति लिए टंकी का स्थान तय कर दिया। ग्रामीणों अब चेतावनी दे रहे हैं कि यदि टंकी को जल्द स्थानांतरित नहीं किया गया तो आंदोलन करेंगे। यह मामला मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा के दौरान उठाने की तैयारी है।
मुखिया भी परेशान
स्थानीय मुखिया प्रियम प्रिया व उनके प्रतिनिधि पंकज कुमार ओझा बताते हैं कि सैकड़ों परिवार पीने के पानी के लिए परेशान हैं। वार्ड पार्षद अनिता देवी, वीरेंद्र कुमार, सुशील कुमार का कहना है कि पीएचईडी का कोई अधिकारी-कर्मचारी संज्ञान नहीं ले रहा। श्मशान के बगल में ही वार्ड-3 है। उससे भी पानी की सप्लाई की जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। श्मशान वाली टंकी से पानी नहीं पीया जा सकता है।
26 लाख रुपये खर्च
वार्ड सचिव वार्ड नंबर-4 के पप्पू दास का कहना है कि इस वार्ड में नल जल के लिए 26 लाख की राशि आवंटित हुई थी। मनमानी के चलते तत्कालीन वार्ड सदस्य बुलबुल कुमार इस्तीफा देकर मुंबई चला गया। तत्कालीन मुखिया अराधना कुमारी से लोग मना करते रहे, पर टंकी श्मशान घाट में ही बनवा दी।
क्या कहती हैं विधायक?
श्मशान घाट जैसे संवेदनशील स्थल का चयन क्यों किया गया? यह मामला बेहद गंभीर और आपत्तिजनक है। अब मेरे संज्ञान में आया है तो पीएचईडी मंत्री संजय कुमार सिंह को इस मामले से अवगत कराऊंगी। इसकी जांच कराई जाएगी। नल जल के स्ट्रक्चर को स्थानांतरिक कराया जाएगा। - बेबी कुमारी, स्थानीय विधायक
इंजीनियर बोले- मामला गंभीर
मामला संवेदनशील है। चार साल पहले यह योजना पंचायत के अधीन थी। पीएचईडी की जिम्मेदारी सिर्फ मॉनीटरिंग थी। तब इसकी अनुमति किसने और किन परिस्थितियों में दी यह कार्यपालक अभियंता मुकेश कुमार से जांच कराने को कहा है। यह सरकारी राशि का दुरुपयोग का मामला है। - ईं. मनोज मनोहर, अधीक्षण अभियंता





