जर्जर होने लगा विक्रमशिला सेतु? जॉइंट में दरार, प्रॉटेक्शन वॉल टूटी, रोजाना गुजरती हैं 40 हजार गाड़ियां

हिन्दुस्तान, वरीय संवाददाता, भागलपुर
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भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु के जॉइंट में दरार बढ़ने लगी है। तीन पिलर के प्रोटेक्शन वॉल टूट गई है। सड़क भी बिखरने लगी है। इससे पुल की सेहत पर खतर मंडरा रहा है। इस पर ट्रैफिक का भी भारी दबाव रहता है। 

Vikramshila Setu

बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु जर्जर होने की स्थिति में आ रहा है। लंबे समय से मरम्मत नहीं होने से कई दिक्कतें हो रही हैं। जॉइंट में दरार बढ़ गई है, तीन पिलर की प्रोटेक्शन वॉल टूट गई है। इस पुल से रोजाना 35 से 40 हजार छोटी-बड़ी गाड़ियां गुजरती हैं। पायों की सुरक्षा दीवार जर्जर होने से पुल पर हादसे का खतरा मंडरा गया है। विक्रमशिला सेतु पर रोजाना हजारों वाहनों के दबाव से इसकी सेहत बिगड़ रही है। मरम्मत के अभाव के कारण पुल की सड़क भी टूटकर बिखर रही है।

गंगा नदी के उत्तरी और दक्षिण छोर को आपस में जोड़ने वाले इस पुल के कई एक्सपेंशन ज्वॉइंट में दरार काफी बढ़ गई है। पुल के ऊपर लगे 50 से 65 नंबर बिजली के पोल के नीचे पिलर नंबर 17, 18 और 19 के प्रोटेक्टशन वॉल धराशायी हो चुके हैं। बाढ़ के दौरान नदी की तेज धारा के थपेड़ों से इनमें से एक वॉल पूरी तरह से उखड़ गया है। वहीं दूसरे वॉल का आधा हिस्सा टूटकर बह गया है। जबकि तीसरा वॉल टेढ़ा हो गया है। वहीं पुल की रेलिंग भी कई जगह से टूट गई है।

जिम्मेदार क्या बोले?

विक्रमशिला सेतु की मरम्मत आज से एक दशक पहले की गई थी। तब से समग्र तरीके से मरम्मत का काम नहीं हुआ है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर ज्ञानचंद दास ने बताया कि विक्रमशिला पुल के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी एनएच प्रशासन और एनएचएआई की है। पुल की खस्ताहाल रिपोर्ट को एनएच प्रशासन ने पुल निर्माण निगम को भेजा है। पुल की वस्तुस्थिति की जांच कर इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

उन्होंने कहा कि विक्रमशिला सेतु के समानांतर बन रहे दूसरे पुल का काम भी तेजी से चल रहा है। समानांतर पुल के बनने के बाद विक्रमशिला सेतु पर वाहनों का दबाव काफी कम हो जाएगा।

विक्रमशिला सेतु का निर्माण 2001 में पूरा हुआ था। यह 4.7 किलोमीटर लंबा पुल है। भागलपुर और नौगछिया को जोड़ता है। इसका नाम प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय के नाम पर रखा गया। बताया जा रहा है कि 2016 में इसकी मरम्मत की गई थी, उसके बाद यहां कोई बड़ा काम नहीं हुआ। यह पुल अब तकनीकी रखरखाव का इंतजार है।

विक्रमशिला सेतु दो लेन का पुल होने के चलते इस पर ट्रैफिक का काफी दबाव है, इसलिए सरकार इसके समानांतर नया चार लेन पुल बना रही है। जो पुराने पुल के 50 मीटर की दूरी पर ही स्थित है।

Jayesh Jetawat

लेखक के बारे में

Jayesh Jetawat

जयेश जेतावत एक अनुभवी, जुझारू एवं निष्पक्ष पत्रकार हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग एवं संपादन में महारत हासिल है। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। तकनीकी रूप से निपुण जयेश, तथ्यों की बारीकी से जांच कर समयसीमा के भीतर पाठकों तक सटीक खबरें एवं शोध-परक विश्लेषण पहुंचाते हैं। जनसरोकार के मुद्दे उठाना, पेशेवर नैतिकता का पालन करना, समाज एवं मानव कल्याण के प्रति जिम्मेदारी, इन्हें और भी योग्य बनाती है। भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ है। जटिल मुद्दों को पाठकों एवं दर्शकों तक आसान शब्दों में पहुंचाना इनकी खूबी है।

जयेश जेतावत मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद ईटीवी भारत में बतौर प्रशिक्षु समाचार संपादक के रूप में काम शुरू किया। फिर इंडिया न्यूज के डिजिटल सेक्शन में विभिन्न बीट कवर की। इसके बाद, वे2न्यूज में बतौर टीम लीडर तीन राज्यों की कमान संभाली। साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े, तब से यहां बिहार की खबरों को कवर कर रहे हैं। जयेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव इंडिया न्यूज चैनल और सी-वोटर रिसर्च एजेंसी में इंटर्नशिप भी की। पटना से प्रकाशित मैगजीन राइजिंग मगध में समसामयिक विषयों पर इनके लेख छपते रहे हैं। समाचार लेखन के अलावा जयेश की साहित्यिक पठन एवं लेखन में रुचि है, सामाजिक मुद्दों पर कई लघु कथाएं लिख चुके हैं।

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