VIDEO: कीचड़ वाली खेत में कूदकर ही मानीं IAS वर्षा सिंह ; मजदूरों के साथ धान रोपने लगीं डीएम
डीएम वर्षा ने सिंह मजदूरों के साथ खेत में उतरकर धान रोपा, जिससे महिला मजदूरों और किसानों में उत्साह बढ़ गया। उन्होंने प्राकृतिक खेती के लिए डीएम ने जागरूक किया।

कभी जिलाधिकारी की ऊंची कुर्सी पर कलम चलाते हाथ, तो कभी कीचड़ वाले खेत में उतरकर मजदूरों के साथ धान रोपने के लिए बेताब कदम। ये दोनों तस्वीरें आईएएस अधिकारी वर्षा सिंह के हैं जो इन दिनों वैशाली जिले की डीएम हैं। गुरुवार को बिदुपुर प्रखंड के सहदुल्लाहपुर धबौली खजबत्ता गांव में प्राकृतिक खेती कर रहे उमेश राय के खेत में जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह ने मजदूरों के साथ धान रोपनी की और कृषि कार्यों का निरीक्षण किया। इस अवसर पर डीएम ने स्थानीय किसानों के साथ संवाद भी किया। डीएम ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित भी किया।
डीएम वर्षा सिंह ने स्वयं मजदूरों के साथ खेत में उतरकर धान रोपा, जिससे महिला मजदूरों और किसानों में उत्साह बढ़ गया। इसके के साथ ही प्राकृतिक खेती के लिए डीएम ने किसानों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि कृषि ही जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने किसानों से ससमय धान रोपनी करने, उन्नत बीजों का उपयोग करने तथा वैज्ञानिक पद्धति अपनाने की अपील की। इस अवसर पर जिला कृषि पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से किसानों को बीज, खाद एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उत्पादन में वृद्धि हो सके।
किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध करवाएं
उन्होंने बताया कि जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपना कर किसान बेहतर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। इस मौके पर किसानों ने डीएम के इस पहल की सराहना की और कहा कि प्रशासन की सीधी भागीदारी से उनका मनोबल बढ़ा है। जिला पदाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को हर संभव सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए तथा कृषि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती से संबंधित जानकारी दी।
प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को भुगतान
बिदुपुर प्रखंड अंतर्गत 10 कलस्टर में प्राकृतिक खेती से जुड़े 1250 किसानों को डीबीटी के माध्यम से 02 हजार रुपए प्रति एकड़ कृषक को राशि का भुगतान किया। इसके साथ ही बीआरसी (बायो रिसर्च सेंटर) खजबत्ता का भी डीएम ने निरीक्षण किया।
धान की रोपनी में विलंब
वैशाली जिले में खरीफ फसलों की बुआई काफी विलंब हो रही है। खरीफ फसल के लायक बारिश नहीं होने, भूमिगत जलस्त्रोत एवं बरसाती अस्थायी नहर की दयनीय स्थिति के कारण किसान बारिश पर निर्भर हैं। किसानों का कहना है कि विलंब से रोहणी और आद्रा नक्षत्र में अनुमान से कम बारिश हुई थी।
किसान पटवन कर धान रोपनी के लिए बिचड़ा गिराए थे, लेकिन रोपनी के दौरान जरूरत से कम बारिश होने के कारण रोपनी कम हुई है। जिले में इस साल 48831.58 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित है। इसमें जिसमें 28 जुलाई तक जिले में 33702.77 हेक्टेयर में धान की रोपनी हुई है, जो लक्ष्य का 69.02 प्रतिशत बताया गया है।
कम बारिश होने पर किसानों ने मक्का बोया
कम बारिश होने से किसानों ने मक्के की खेती शुरू कर दी है। कृषि विभाग के आंकड़े के अनुसार 12530.85 हेक्टेयर में मक्के की खेती के लिए लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अब तक 9102.74 हेक्टेयर में मक्के की बुआई हो चुकी है, जो लक्ष्य का 72.64 फीसदी बताया गया है। जिले में 28 जुलाई तक चेहराकलां में लक्ष्य का 69.01 फीसदी धान की रोपनी किसानों ने कर ली है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।


