नौकरी के लिए गरीब सवर्ण पुरुषों की आयु सीमा 40 वर्ष हो, नीतीश सरकार से सिफारिश

Dec 22, 2025 08:49 am ISTNishant Nandan हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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सवर्ण समाज के छात्र-छात्राओं के लिए हर जिले में 100-100 बेड के छात्रावास की योजना तैयार की गई है। इन छात्रावासों में किसी भी प्रतियोगिता की प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुके युवक-युवतियों को प्रवेश मिलेगा। उन्हें मुख्य परीक्षा में सफल होने को लेकर कोचिंग दी जाएगी।

नौकरी के लिए गरीब सवर्ण पुरुषों की आयु सीमा 40 वर्ष हो, नीतीश सरकार से सिफारिश

सवर्ण आयोग ने सरकारी नौकरियों में अगड़ी जाति के गरीबों के लिए आरक्षित सीटों पर पुरुषों की आयु-सीमा 37 साल से बढ़ाकर 40 साल करने की सिफारिश की है। क्योंकि, अधिकतम उम्र सीमा का लाभ इस वर्ग को नहीं मिल पा रहा है। जबकि, बाकी समुदायों की आरक्षित सीटों पर नौकरी के लिए यही व्यवस्था है। ईडब्ल्यूएस आरक्षण के तहत बिहार में महिलाओं के लिए अधिकतम आयु-सीमा 40 साल ही है। आयोग ने पुरुषों की आयु-सीमा भी इसी के बराबर करने के लिए कहा है।

सवर्ण युवाओं के लिए हर जिले में 100-100 बेड का छात्रावास

जानकारी के अनुसार, सवर्ण समाज के छात्र-छात्राओं के लिए हर जिले में 100-100 बेड के छात्रावास की योजना तैयार की गई है। इन छात्रावासों में किसी भी प्रतियोगिता की प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुके युवक-युवतियों को प्रवेश मिलेगा। उन्हें मुख्य परीक्षा में सफल होने को लेकर कोचिंग दी जाएगी। अगर वे मुख्य परीक्षा में सफल नहीं भी हो पाते हैं तब भी 2 साल तक छात्रावास में रहने की अनुमति दी जाएगी। इस दौरान उन्हें किसी खास रोजगार या नौकरी के लिए कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा। आयोग ने इस संबंध में भी अपनी अनुशंसा की है।

उच्च जाति विकास वित्त निगम की स्थापना हो

राज्य के उच्च जाति को स्वरोजगार के लिए आगे आने पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए उच्च जाति वित्त निगम की स्थापना की अनुशंसा की गई है। इसके तहत उच्च जातियों के लोगों के कारोबार के लिए उनके परियोजना प्रस्ताव के गुण-दोष को देखकर वित्तीय सुविधा दिए जाने पर निर्णय लिया जा सकता है।

उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग, बिहार के अध्यक्ष महाचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग ने उच्च जाति के गरीबों के हित में कई महत्वपूर्ण अनुशंसाएं व प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजी है। आयोग ने सर्वसम्मति से इसे अमल में लाए जाने को आवश्यक बताया है। अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।

Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें