आनंद मोहन ने 2000 में टिकट बेचा था; भाजपा नेता ने चेतन के पापा, लवली के पति को परिवार-मोहन नाम दे दिया

Ritesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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Anand Mohan News: चेतन आनंद के मंत्री नहीं बनने के बाद जेडीयू में पैसे का खेल खोज रहे आनंद मोहन के खिलाफ अब भाजपा ने भी मोर्चा खोल दिया है। सवर्ण आयोग के सदस्य राज कुमार ने आनंद से 2000 में टिकट खरीदने का आरोप लगाया है।

आनंद मोहन ने 2000 में टिकट बेचा था; भाजपा नेता ने चेतन के पापा, लवली के पति को परिवार-मोहन नाम दे दिया

Anand Mohan News: बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी नई सरकार में मंत्री बनने की कोशिश नाकाम रहने पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायक चेतन आनंद के पिता और पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह खुले में बिफर गए हैं। आनंद मोहन ने जदयू को चला रहे नेताओं पर पैसा लेकर मंत्री बनाने का आरोप लगा दिया, जिसके जवाब में नीतीश कुमार के दल के नेता तो जवाब दे ही रहे थे, अब भाजपा के नेता भी कूद पड़े हैं। भाजपा नेता सवर्ण आयोग के सदस्य राज कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि 2000 के चुनाव में उन्होंने आनंद मोहन की बनाई बिहार पीपुल्स पार्टी (बिपीपा) का टिकट खरीदा था। उन्होंने आनंद मोहन को परिवार-मोहन करार दिया और चुनौती दी है कि ताकत है तो सांसद पत्नी लवली आनंद और विधायक बेटे चेतन आनंद को इस्तीफा दिलाकर फिर से जिता लें।

भाजपा नेता राज कुमार सिंह ने कहा कि बिहार पीपुल्स पार्टी के गठन के बाद वह आनंद मोहन के साथ राजनीति कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 2000 के चुनाव में उनको टिकट मिला, जिसे उन्होंने किसके जरिए बेचा, ये आनंद मोहन से पूछना चाहिए। उन्होंने आनंद को परिवार-मोहन का नाम देते हुए कहा कि वह समाज को इस्तेमाल करने और बेचने का काम करते हैं। राज कुमार सिंह ने कहा कि पूर्व और वर्तमान मुख्यमंत्री की कृपा से आनंद मोहन जेल से बाहर हैं। उन्होंने आनंद को चुनौती दी कि हैसियत है तो बेटा और पत्नी को इस्तीफा कराकर दोबारा चुनाव लड़ लें।

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बता दें कि जनता दल के विधायक के तौर पर राजनीति शुरू करने वाले आनंद मोहन ने लालू यादव से मतभेद के बाद अपनी पार्टी बिपीपा बना ली थी। आनंद मोहन ने 2000 के विधानसभा चुनाव में भाजपा, समता पार्टी और जदयू (नीतीश के विलय से पहले) के साथ मिलकर एनडीए के बैनर तले अविभाजित बिहार की 324 सीटों में 20 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे, लेकिन कोई जीत नहीं सका। 9-10 सीटों पर बिपीपा के कैंडिडेट दूसरे नंबर पर रहे थे।

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आनंद मोहन ने सीतामढ़ी में एक बैठक के दौरान कहा था कि जेडीयू में आज थैली की रानजीति हो रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि नीतीश के जमाने में मंच पर भाजपा के दोनों डिप्टी सीएम का तो फोटो लगता था, लेकिन अब जेडीयू के दोनों डिप्टी सीएम का फोटो नहीं लगता है। आनंद मोहन ने चेतन आनंद को शिवहर सीट से नबीनगर भेजने पर भी सवाल उठाया और कहा था कि नीतीश की मजबूरी का फायदा जेडीयू के कुछ नेता उठा रहे हैं। आनंद मोहन ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो चेतन आनंद ने सरकार बचाई थी तो सरकार भी वही चलाएगा। भोजपुर-बक्सर एमएलसी चुनाव में जेडीयू कैंडिडेट की हार पर भी आनंद मोहन ने चुटकी ली थी और कहा था कि थैली की राजनीति को करारा जवाब मिल गया। आनंद मोहन ने नीतीश से राज्यसभा लड़ने के फैसले पर कहा था कि इससे भाजपा और एनडीए को नुकसान होगा, क्योंकि जनता ने 25 से 30 के लिए जनादेश दिया है।

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जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार और निहोरा यादव ने इसका जवाब देते हुए कहा था कि आनंद मोहन जेडीयू में नहीं हैं, उनकी पत्नी लवली आनंद और बेटा चेतन आनंद जेडीयू में हैं, जिन लोगों ने कुछ नहीं कहा है। जेडीयू के नेताओं ने पार्टी के आधिकारिक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा था कि अगर नीतीश कुमार नहीं होते तो आनंद मोहन जेल से बाहर नहीं आ पाते। बता दें कि गोपालगंज के डीएम की हत्या के केस में आनंद मोहन आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे, जिन्हें नीतीश सरकार ने जेल नियमों में बदलाव करके बाहर निकाला था। जेल नियमो में हुए इस बदलाव का फायदा आनंद मोहन के अलावा भी कुछ लोगों को मिला, लेकिन इसे आनंद मोहन की रिहाई से ही जोड़कर देखा गया। जेडीयू ने कहा कि जब जेल से निकाला और पत्नी को सांसद और बेटा को विधायक बनाया तो जेडीयू ठीक थी, मंत्री नहीं बनाया तो खराब, ये नहीं चलेगा।

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आनंद मोहन के परिवार से कितने लोग सांसद और विधायक हैं?
आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद शिवहर से जेडीयू की सांसद हैं और बेटा चेतन आनंद नबीनगर सीट से जेडीयू के विधायक हैं. आनंद मोहन खुद भी विधायक और सांसद रहे हैं.
Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा पत्रकारिता में 25 साल से अलग-अलग भूमिका में अखबार, टीवी और डिजिटल में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण के साथ बिहार में 5 साल तक जिला स्तर की प्रशासनिक और क्राइम रिपोर्टिंग करने के बाद रीतेश ने आईआईएमसी, दिल्ली में दाखिला लेकर पत्रकारिता की पढ़ाई की। एक साल के अध्ययन ब्रेक के बाद रीतेश ने विराट वैभव से दोबारा काम शुरू किया। फिर दैनिक भास्कर में देश-विदेश का पेज देखा। आज समाज में पहले पन्ने पर काम किया। बीबीसी हिन्दी के साथ आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े। अखबारों के बाद रीतेश ने स्टार न्यूज के जरिए टीवी मीडिया में कदम रखा। रीतेश ने टीवी चैनलों में रिसर्च डेस्क पर लंबे समय तक काम किया है और देश-दुनिया के विषयों पर तथ्यपरक जानकारी सहयोगियों को आगे इस्तेमाल के लिए मुहैया कराई है। सहारा समय और इंडिया न्यूज में भी रीतेश रिसर्च का काम करते रहे। इंडिया न्यूज की पारी के दौरान वो रिसर्च के साथ-साथ चैनल की वेब टीम के हेड बने और इनखबर न्यूज पोर्टल को बतौर संपादक शुरू किया। लाइव हिन्दुस्तान के साथ एडिटर- न्यू इनिशिएटिव के तौर पर पिछले 6 साल से जुड़े रीतेश फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार की खबरों और दोनों राज्यों की टीम को देखते हैं। और पढ़ें
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