उपेंद्र कुशवाहा के बेटे मंत्री बने रहेंगे, दीपक प्रकाश के लिए भाजपा MLC देवेश कुमार का इस्तीफा
उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश बिहार की सम्राट सरकार में मंत्री बने रहेंगे। उनके लिए भाजपा एमएलसी देवेश कुमार ने विधान परिषद की सीट छोड़ दी है। देवेश ने विधान परिषद की सदस्यता से शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। अब इस सीट से दीपक को एमएलसी बनाया जाएगा।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के मंत्री पद से संकट टलता दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एमएलसी देवेश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि अब उनकी सीट से सम्राट सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाया जाएगा। दीपक अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। बिना विधायक या एमएलसी रहे, उनके मंत्री पद पर बने रहने पर संकट पैदा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी सम्राट सरकार से इस बारे में जवाब-तलब किया।
भाजपा के विधान पार्षद देवेश कुमार ने शुक्रवार को सभापति अवधेश नारायण सिंह को अपना इस्तीफा सौंपा। इस दौरान बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी भी मौजूद रहे। हालांकि उन्होंने मीडिया कर्मियों के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। वह गाड़ी में बैठकर चले गए। देवेश के इस्तीफे की अधिसूचना आज ही जारी हो सकती है।
मार्च 2027 तक कार्यकाल
भाजपा के देवेश कुमार राज्यपाल द्वारा मनोनित कोटा से 17 मार्च 2021 को एमएलसी बने थे। उनका कार्यकाल 16 मार्च 2027 को पूरा होने वाला है। उससे पहले ही उन्होंने सदस्यता छोड़ दी। देवेश के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर राज्यपाल नए उम्मीदवार को मनोनीत करेंगे। सूत्रों के अनुसार, दीपक प्रकाश का नाम लगभग तय माना जा रहा है। दीपक एमएलसी बने तो उनका कार्यकाल भी अगले साल मार्च तक होगा।
सुप्रीम कोर्ट में दीपक प्रकाश का मामला, सरकार जवाब-तलब
दीपक प्रकाश के बिना विधायक और एमएलसी रहे अब तक मंत्री बने रहने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर है। इस पर सुनवाई के दौरान हाल ही में शीर्ष अदालत ने सम्राट सरकार को जवाब-तलब किया। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने बिहार सरकार से पूछा कि दीपक प्रकाश ना तो विधान सभा के सदस्य हैं और ना ही विधान परिषद के, तो फिर वह अपने पद पर क्यों बने हुए हैं।
सीजेआई ने कहा कि यह पूरी तरह कानून का सवाल है। राज्य सरकार को यह बताना होगा कि कोई मंत्री बिना चुने गए, 6 महीने से अधिक समय तक कैसे पद पर बना हुआ है। राज्य सरकार के पास 4 अगस्त तक जवाब दाखिल करने का समय है।
बिना विधायक-एमएलसी रहे दो बार मंत्री बने दीपक प्रकाश
उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को पहली बार नवंबर 2025 में तत्कालीन नीतीश कैबिनेट में शामिल किया गया था। उस समय भी वह ना तो विधायक थे और ना ही एमएलसी। वह लगभग 4-5 महीने तक मंत्री पद पर रहे। राज्य में जब सत्ता परिवर्तन हुआ, तो नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही तत्कालीन कैबिनेट भंग हो गई।
उसके बाद सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए की नई सरकार का गठन किया गया। मई 2026 में सम्राट कैबिनेट के विस्तार में रोलोमो कोटे से दोबारा दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया। दीपक ने 7 मई को मंत्री पद की शपथ ली। तब से बिना किसी सदन के सदस्य रहे मंत्री पद पर बने हुए हैं। उन्हें दोबारा मंत्री बनाए जाने पर चुनौती देते हुए राकेश कुमार सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई चल रही है।
क्या कहता है कानून
नियमों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति विधायक अथवा एमएलसी नहीं है, तो वह अधिकतम 6 महीने तक ही मंत्री पद पर बने रह सकता है। मंत्री पद पर बने रहने के लिए उसे इस अवधि के अंदर किसी ना किसी सदन की सदस्यता लेना अनिवार्य होता है।


