आने वाले 20 सालों के लिए उपेंद्र कुशवाहा को मौका मिले; राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने कर दी बड़ी बात
- पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के लिए उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने शासन के अगले 20 साल मांग लिए हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कभी पास, कभी साथ और कभी दूर रहने वाले राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के लिए जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएमएल) में आए पूर्व विधान पार्षद रामेश्वर महतो ने शासन के अगले 20 साल मांग लिए हैं। लोकसभा चुनाव में सीतामढ़ी सीट से जेडीयू का टिकट मांग रहे रामेश्वर महतो ने पिछले साल जदयू से इस्तीफा दे दिया था और पार्टी के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर पर खूब बरसे थे। गुरुवार को पटना में रालोमो के कर्पूरी ठाकुर जयंती समारोह में महतो कुशवाहा की पार्टी में शामिल हो गए।
रामेश्वर महतो ने आरएमएल में शामिल होने के बाद कहा कि उपेंद्र कुशवाहा देश में पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने न्यायपालिका के कॉलेजियम सिस्टम में सुधार को लेकर संसद में आवाज उठाई है। महतो ने कहा कि उनके जदयू छोड़ने के जो भी कारण हों लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके पिता तुल्य हैं और हमेशा उनके अभिभावक रहेंगे। महतो ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि उपेंद्र कुशवाहा को आने वाले 20 साल के लिए शासन का मौका मिलना चाहिए।
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उपेंद्र कुशवाहा जब भाषण देने आए तो उन्होंने रामेश्वर महतो की बात को संभाला और कहा कि इस तरह की बात उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अगले पांच साल नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश एनडीए को मजबूत करना है। हमारी पार्टी अभी सत्ता की सहयोगी है, आने वाले चुनाव में हम भागीदार होंगे। उन्होंने कहा कि सीटों को लेकर कोई विवाद नहीं है और उनकी पार्टी गठबंधन में तय सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि सभी को टिकट नहीं दे सकते लेकिन जिनको टिकट मिलेगा, उसको जिताकर भेजना है ताकि सत्ता में हमारी भागीदारी हो सके।
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रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जब जदयू पहली बार राजद के साथ चला गया था, तब जदयू का नुकसान करना उनका मिशन था। अब ऐसा नहीं है क्योंकि सारे दल एक साथ एनडीए में शामिल हैं। अब सबका उद्देश्य एक है। उन्होंने कहा कि रामेश्वर महतो जदयू में रहें या रालोमो में, कोई विशेष अंतर नही पड़ता है। लेकिन अगर महतो राजद में गए होते तो जदयू, रालोमो के साथ एनडीए को भी नुकसान होता।





