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बीवी सेट, बेटा नेक्स्ट; उपेंद्र कुशवाहा भी परिवार फर्स्ट वाले नेता हो गए; नीतीश कुमार इकलौते अपवाद

बीवी सेट, बेटा नेक्स्ट; उपेंद्र कुशवाहा भी परिवार फर्स्ट वाले नेता हो गए; नीतीश कुमार इकलौते अपवाद

संक्षेप:

बिहार में सारे नेता बीवी, बेटा, बहू, दामाद, भाई को राजनीति में आगे बढ़ा रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा भी अब उसी लिस्ट से शामिल हो गए हैं। नीतीश कुमार इकलौते नेता बचे हैं, जिनका बेटा निशांत या परिवार से कोई और राजनीति में नहीं है।

Tue, 28 Oct 2025 12:17 PMRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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समाजवादी उपेंद्र कुशवाहा परिवारवादी हो गए हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने ‘परिवार फर्स्ट’ वाले नेताओं में शामिल होते हुए अपनी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा को सासाराम सीट से टिकट दिया है। बेटा दीपक कुशवाहा को इसी बार महुआ सीट से लड़ाने का प्लान था, लेकिन चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी - रामविलास (एलजेपी-आर) ने सीट ले ली। इसके बाद नाराज कुशवाहा को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता अमित शाह ने दिल्ली बुलाकर उनको राज्यसभा में बनाए रखने के साथ एक विधान परिषद सीट ऑफर की, तब वो माने। विधान परिषद से कुशवाहा अपने बेटे दीपक कुशवाहा को लॉन्च करेंगे, जो महुआ सीट हाथ से निकलने के कारण फिलहाल टल गया है।

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बिहार की राजनीति में अब बड़े नेताओं में नीतीश कुमार इकलौते बच गए हैं, जिनके परिवार से कोई राजनीति में नहीं है। उपेंद्र कुशवाहा काफी समय से नीतीश कुमार को बेटे निशांत कुमार को जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में लाने की सलाह दे रहे थे और सावधान कर रहे थे कि ऐसा नहीं हुआ तो पार्टी बिखर जाएगी। नीतीश कुमार ने तो उस सलाह पर अमल नहीं किया, लेकिन कुशवाहा ने उस पर काम शुरू कर दिया है। सासाराम से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की उम्मीदवार पत्नी स्नेहलता कुशवाहा बन गई हैं। आगे विधान परिषद का चुनाव होगा तो बेटे दीपक कुशवाहा का भी नंबर लग जाएगा।

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परिवारवाद और मोल-भाव को लेकर एनडीए में सबकी नजर चिराग पासवान और जीतनराम मांझी पर टिकी थी, उन दोनों ने परिवार को निराश भी नहीं किया। लेकिन कुशवाहा भी माहिर खिलाड़ी निकले। गठबंधन में रालोमो को मिली 6 सीटों के अलावा अपने दो नेताओं को भाजपा और जेडीयू के सिंबल पर लड़वा लिया। ये मौका चिराग या मांझी को नहीं मिला। उपेंद्र कुशवाहा ने सासाराम सीट से स्नेहलता कुशवाहा, पारू से मदन चौधरी, मधुबनी से माधव आनंद, दिनारा से आलोक सिंह, उजियारपुर से प्रशांत पंकज एवं बाजपट्टी से रामेश्वर महतो को रालोमो के चिह्न सिलेंडर पर उतारा है। रालोमो नेता पप्पू वर्मा कुर्था से जेडीयू के सिंबल पर और रणविजय सिंह गोह में भाजपा के चुनाव चिह्न पर लड़ रहे हैं।

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Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा लगभग ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। बिहार में दैनिक जागरण से करियर की शुरुआत करने के बाद दिल्ली-एनसीआर में विराट वैभव, दैनिक भास्कर, आज समाज, बीबीसी हिन्दी, स्टार न्यूज, सहारा समय और इंडिया न्यूज के लिए अलग-अलग भूमिका में काम कर चुके हैं। और पढ़ें
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