
सही खेल गए उपेंद्र कुशवाहा; 4 विधायक अपना, 1 नेता JDU से MLA; बेटा मंत्री है तो 1 MLC भी पक्का
Upendra Kushwaha Family Politics: काराकाट से लोकसभा हारे उपेंद्र कुशवाहा विधानसभा में सही बाजी खेल गए। कुशवाहा की रालोमो से 4 विधायक जीते हैं। एक नेता जेडीयू से MLA बना है। बेटे दीपक मंत्री बन गए हैं तो 1 MLC भी तय है।
Upendra Kushwaha Family Politics: बिहार विधानसभा चुनाव और नीतीश कुमार की नई सरकार के गठन में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा सही से खेल गए। कुशवाहा की पार्टी रालोमो के टिकट पर लड़े 6 कैंडिडेट में 4 विधायक बन गए हैं, जिनमें उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा भी शामिल हैं। कुशवाहा ने अपनी पार्टी के दो नेताओं का भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के सिंबल पर भी सेट कर दिया। उन दोनों में भी एक जीत गए हैं। नीतीश कैबिनेट में कुशवाहा ने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनवा लिया। दीपक किसी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उनको मंत्री बनाकर उन्होंने एक विधान पार्षद (एमएलसी) सीट भी अब पक्की कर ली है।
सीट बंटवारे से पहले ‘एनडीए में इस बार कुछ भी ठीक नहीं है’ कहकर हाहाकार मचा देने वाले आरएलएम सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने ऐसी सधी राजनीतिक बाजी खेली है कि चुनाव नतीजों और कैबिनेट गठन के बाद हर कोई उनके राजनीतिक कौशल की चर्चा कर रहा है। चुनाव नतीजों के बाद लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर) के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सबसे ज्यादा फायदे में नजर आ रहे थे। लोजपा का 29 लड़कर 19 जीतना और उसके हिसाब से 2 मंत्री मिलना स्वाभाविक है। जीतनराम मांझी की पार्टी हम का 6 सीट लड़ना और 5 जीतकर 1 मंत्री बनना प्रत्याशित चीज है।
सीट बंटवारे में 6 सीट मिलने और खास तौर पर महुआ सीट लोजपा को मिलने से उपेंद्र कुशवाहा की खुली नाराजगी के बाद उनको मनाने के लिए रातों-रात नित्यानंद राय हवाई जहाज से दिल्ली ले गए थे। लोकसभा चुनाव के दौरान पवन सिंह के लड़ने से काराकाट सीट पर उपेंद्र कुशवाहा के फंसने और अंततः हारने के कारण शाहाबाद और मगध में एनडीए को महागठबंधन ने पीछे छोड़ दिया था। बीजेपी विधानसभा में उनकी नाराजगी नहीं चाहती थी। कुशवाहा माने, लेकिन अपनी राजनीतिक ताकत की भरपूर कीमत वसूली।
कुशवाहा ने रालोमो को मिली 6 सीटों के ऊपर अपनी पार्टी के नेता पप्पू वर्मा को जेडीयू के सिंबल पर कुर्था से लड़वाया और वो जीतकर जदयू के विधायक बन गए हैं। कुशवाहा ने रालोमो के दूसरे नेता रणविजय सिंह को गोह सीट से बीजेपी के टिकट पर लड़वाया जो हार गए। कुशवाहा ने खुद के राज्यसभा कार्यकाल को आगे बढ़ाने का भरोसा लिया। महुआ लोजपा को जाने से बेटे को लॉन्च करने के लिए एक एमएलसी सीट भी झटक ली।
बीजेपी और जेडीयू के 2-2 एमएलसी असेंबली चुनाव जीते हैं। चार सीट खाली होना और वहां चुनाव पक्का है। कुशवाहा पत्नी स्नेहलता और पार्टी के विधायक माधव आनंद को मंत्री बनाते तो एमएलसी सीट के लिए दोबारा संघर्ष करना पड़ता। बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनवाकर उपेंद्र कुशवाहा ने यह भी पक्का कर लिया है कि एमएलसी के अगले चुनाव में उनका बेटा दिए गए भरोसे के मुताबिक विधान परिषद में पहुंच जाए।
सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लाने और जेडीयू की बागडोर थमाने की खुली वकालत करने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने इससे पहले परिवार को राजनीति से दूर रखा था। बिहार के बड़े नेताओं में नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा इस तरह के विरलै नेता थे। कुशवाहा ने अब पत्नी को विधायक और बेटे को मंत्री बनाकर खुद को उस लीग से अलग कर लिया है।





