बिना एमएलसी बने कितने दिन मंत्री रहेंगे दीपक प्रकाश? इस्तीफा मजबूरी; उपेंद्र कुशवाहा दिल्ली जा रहे

लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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Deepak Prakash Kushwaha News: रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा दोपहर बाद दिल्ली जा रहे हैं। दिल्ली में 13 जून को पार्टी का राष्ट्रीय सम्मेलन है। कुशवाहा की दिल्ली यात्रा को पार्टी इस सम्मेलन से जोड़ रही है।

बिना एमएलसी बने कितने दिन मंत्री रहेंगे दीपक प्रकाश? इस्तीफा मजबूरी; उपेंद्र कुशवाहा दिल्ली जा रहे

Deepak Prakash Kushwaha News: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की मेहरबानी के इंतजार में अब घंटे गिन रहे राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार के कैबिनेट मंत्री दीपक प्रकाश कुशवाहा को सीएम सम्राट चौधरी अपनी सरकार में कितने दिन रखेंगे, यह सवाल आज शाम पैदा हो जाएगा। बिहार विधान परिषद की 9 सीटों के लिए 6 साल कार्यकाल के द्विवार्षिक चुनाव और 1 सीट के लिए 4 साल टर्म के उप-चुनाव में नामांकन का आखिरी दिन है और आखिरी घंटे चल रहे हैं। दीपक ना तो विधायक हैं और ना विधान पार्षद बनते दिख रहे हैं। ऐसे में शपथ की तारीख से 6 महीने के अंदर इस्तीफा देना होगा। दीपक इस्तीफा खुद देंगे या सम्राट को त्यागपत्र देने कहना होगा, यह भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के अंदर उपेंद्र कुशवाहा के घटते कद और वजन का इशारा करेगा।

इस बीच दीपक के पिता और रालोमो के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा दोपहर बाद दिल्ली जा रहे हैं। 13 जून को दिल्ली में रालोमो का राष्ट्रीय सम्मेलन है। पार्टी के सूत्रों ने कुशवाहा की यात्रा को सम्मेलन के साथ जोड़ा है, लेकिन एमएलसी चुनाव के नामांकन के आखिरी दिन उनकी दिल्ली यात्रा का दायरा बड़ा हो सकता है। रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा आज दोपहर बाद दिल्ली रवाना होंगे। दिल्ली में 13 जून को पार्टी का राष्ट्रीय महाधिवेशन है। इसको लेकर वह दिल्ली जा रहे हैं। रालोमो के सूत्र बता रहे हैं कि पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के एमएलसी चुनाव में नामांकन के लिए भाजपा की ओर से अब तक कोई सूचना नहीं दी गई है। आज शाम तक ही नॉमिनेशन का समय है।

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चार विधायकों वाली पार्टी रालोमो में कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता कुशवाहा को छोड़ दें तो बाकी तीन विधायक माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो किसी भी निर्णायक मौके पर कुशवाहा को झटका दे सकते हैं। तीनों तभी से तेवर में हैं, जब दीपक को जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार की सरकार में 20 नवंबर को पहली बार मंत्री बनाया गया था। दीपक प्रकाश के लिए छह महीने के अंदर विधानसभा या विधान परिषद पहुंचने की संवैधानिक बाध्यता 5 महीना बीतने से पहले 15 अप्रैल को नीतीश के इस्तीफे और कैबिनेट भंग होने के साथ खत्म हो गई थी।

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सम्राट चौधरी ने दीपक प्रकाश को बिना किसी सदन में रहे अपनी नई सरकार में 7 मई को दोबारा कैबिनेट में शामिल किया था। छह महीने के अंदर किसी सदन का सदस्य बनने के नियम को ऐसी स्थिति की कल्पना किए बिना लिखा गया था कि कोई मंत्री सीएम के ही छह महीने के अंदर इस्तीफे के बाद दूसरे सीएम के साथ दूसरी पारी में 6 महीने से ज्यादा दिन तक मंत्री रह सकता है। कुशवाहा के बेटे को इस अस्पष्टता का लाभ मिल सकता था, लेकिन बीजेपी ने एमएलसी चुनाव में उन्हें उतारा ही नहीं है।

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दीपक प्रकाश इस हिसाब से बिना एमएलए या एमएलसी बने अधिकतम नवंबर के पहले हफ्ते तक मंत्री बने रह सकते हैं। लेकिन बीजेपी ने अगर एमएलसी नहीं बनाया तो मंत्री का पद भी कितने दिन रहेगा, यह समझा जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में इसे उपेंद्र कुशवाहा द्वारा पार्टी का भाजपा में विलय करने के प्रस्ताव को ठुकराने से जोड़कर भी देखा जा रहा है। कुशवाहा भी मार्च में भाजपा के समर्थन से ही फिर से राज्यसभा जा सके थे।

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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से भाजपा के 4, जदयू के 3 और चिराग पासवान की लोजपा-रामविलास के 1 कैंडिडेट द्विवार्षिक चुनाव लड़ रहे हैं। जदयू का एक कैंडिडेट उप-चुनाव वाली 1 सीट से उतर रहा है। एनडीए के कुल 9 कैंडिडेट घोषित हुए हैं, जिनको गठबंधन के 202 विधायक आसानी से जिता सकते हैं। इसमें भाजपा के पवन सिंह भी शामिल हैं, जिनकी वजह से कुशवाहा को काराकाट से लोकसभा में शर्मनाक हार मिली थी। राजद ने भी एक कैंडिडेट दिया है, जिसे विपक्ष के 41 विधायक जिता सकते हैं। 243 विधायकों के वोट करने पर एक कैंडिडेट को जीतने के लिए 25 विधायकों का वोट चाहिए होगा।

Ritesh Verma

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रीतेश वर्मा पत्रकारिता में 25 साल से अलग-अलग भूमिका में अखबार, टीवी और डिजिटल में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण के साथ बिहार में 5 साल तक जिला स्तर की प्रशासनिक और क्राइम रिपोर्टिंग करने के बाद रीतेश ने आईआईएमसी, दिल्ली में दाखिला लेकर पत्रकारिता की पढ़ाई की। एक साल के अध्ययन ब्रेक के बाद रीतेश ने विराट वैभव से दोबारा काम शुरू किया। फिर दैनिक भास्कर में देश-विदेश का पेज देखा। आज समाज में पहले पन्ने पर काम किया। बीबीसी हिन्दी के साथ आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े। अखबारों के बाद रीतेश ने स्टार न्यूज के जरिए टीवी मीडिया में कदम रखा। रीतेश ने टीवी चैनलों में रिसर्च डेस्क पर लंबे समय तक काम किया है और देश-दुनिया के विषयों पर तथ्यपरक जानकारी सहयोगियों को आगे इस्तेमाल के लिए मुहैया कराई है। सहारा समय और इंडिया न्यूज में भी रीतेश रिसर्च का काम करते रहे। इंडिया न्यूज की पारी के दौरान वो रिसर्च के साथ-साथ चैनल की वेब टीम के हेड बने और इनखबर न्यूज पोर्टल को बतौर संपादक शुरू किया। लाइव हिन्दुस्तान के साथ एडिटर- न्यू इनिशिएटिव के तौर पर पिछले 6 साल से जुड़े रीतेश फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार की खबरों और दोनों राज्यों की टीम को देखते हैं। और पढ़ें
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