नेपाल में बारिश से बिहार में बेमौसम बाढ़, कनकई नदी पर चचरी पुल टूटा; गांव बने टापू
नेपाल में बारिश से बिहार में बेमौसम बाढ़ आ गई है। कनकई नदी में उफान आने से चचरी पुल टूट गया। किशनगंज जिले के कई गांव टापू बन गए हैं। सीमांचल में भी बीते 24 घंटे से रुक-रुक कर आंधी और बारिश हो रही है।

पड़ोसी देश नेपाल में गुरुवार शाम से हुई तेज बारिश का असर भारत के सीमावर्ती क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है। बिहार में भारत-नेपाल सीमा से सटे किशनगंज जिले में कनकई नदी उफना गई है। दिघलबैंक प्रखंड क्षेत्र बूढ़ी कनकई और कनकई नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हो गया। कनकई नदी के तेज बहाव के कारण सिंघीमारी पंचायत के पलसा, मंदिरटोला और बलवाडांगी तथा लोहागाड़ा पंचायत के कंचनबाड़ी घाट पर बना अस्थायी चचरी पुल बहकर टूट गया।
पुल के टूट जाने से नेपाल सीमा से सटे नदी पार के कई गांवों का संपर्क मुख्य क्षेत्र से कट गया है। पलसा, मंदिरटोला, डाकूपारा, बैजनाथ टोला पलसा और तालटोला सहित करीब आधा दर्जन गांव एक बार फिर टापू में तब्दील हो गए हैं। इन गांवों के लोगों को आवागमन के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस पुल के टूटने से बच्चों की पढ़ाई, मरीजों के इलाज और दैनिक जरूरतों की आपूर्ति पर भी असर पड़ता है।
सीमा सुरक्षा सड़क पर भी काम फिर से बाधित
दूसरी ओर, बेमौसम बारिश के कारण कनकई नदी का जलस्तर बढ़ने से भारत-नेपाल सीमा के पास चल रहे पुल और सड़क निर्माण कार्य पर भी असर पड़ा है। कंचनबाड़ी घाट पर निर्माणाधीन पुल के लिए इंडो-नेपाल सड़क निर्माण कंपनी द्वारा बनाया गया अस्थायी डायवर्सन तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गया है। नदी का पानी डायवर्सन के ऊपर से बहने लगा, जिससे एक बार फिर निर्माण कार्य ठप हो गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब डायवर्सन टूटने से निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। इससे पहले भी नेपाल में हुई बारिश के कारण पिछले वर्ष अक्टूबर और नवंबर महीने में दो बार डायवर्सन बह गया था। उस समय भी निर्माण एजेंसी को नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार करना पड़ा था, जिसके कारण कई महीनों तक काम बंद रहा।
यही नहीं इस प्रकार के बेमौसम बारिश और नेपाल से आने वाले पानी के तेज और अचानक वाले बहाव के कारण बारंबार कंपनी को भारी आर्थिक क्षति का भी सामना करना पड़ता है। पिछली बार की तरह इस बार भी कंपनी की कई मशीन, लोहे की छड़ें, सीमेंट, गिट्टी, बालू आदि नदी के बढ़े हुए जलस्तर के कारण बर्बाद हो गए हैं और काम भी बंद हो गया है। कार्य कर रही कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर रविश कुमार की मानें तो अगर सबकुछ बहुत जल्द ठीक हुआ तो भी दुबारा कार्य प्रारंभ होने में कम से कम पंद्रह दिन लगेंगे।
(रिपोर्ट- एक संवाददाता, दिघलबैंक)
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Jayesh Jetawatजयेश जेतावत एक अनुभवी, जुझारू एवं निष्पक्ष पत्रकार हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग एवं संपादन में महारत हासिल है। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। तकनीकी रूप से निपुण जयेश, तथ्यों की बारीकी से जांच कर समयसीमा के भीतर पाठकों तक सटीक खबरें एवं शोध-परक विश्लेषण पहुंचाते हैं। जनसरोकार के मुद्दे उठाना, पेशेवर नैतिकता का पालन करना, समाज एवं मानव कल्याण के प्रति जिम्मेदारी, इन्हें और भी योग्य बनाती है। भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ है। जटिल मुद्दों को पाठकों एवं दर्शकों तक आसान शब्दों में पहुंचाना इनकी खूबी है।
जयेश जेतावत मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद ईटीवी भारत में बतौर प्रशिक्षु समाचार संपादक के रूप में काम शुरू किया। फिर इंडिया न्यूज के डिजिटल सेक्शन में विभिन्न बीट कवर की। इसके बाद, वे2न्यूज में बतौर टीम लीडर तीन राज्यों की कमान संभाली। साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े, तब से यहां बिहार की खबरों को कवर कर रहे हैं। जयेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव इंडिया न्यूज चैनल और सी-वोटर रिसर्च एजेंसी में इंटर्नशिप भी की। पटना से प्रकाशित मैगजीन राइजिंग मगध में समसामयिक विषयों पर इनके लेख छपते रहे हैं। समाचार लेखन के अलावा जयेश की साहित्यिक पठन एवं लेखन में रुचि है, सामाजिक मुद्दों पर कई लघु कथाएं लिख चुके हैं।


