इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं..., जदयू का नाम 'जनता दल नीतीश'करने पर बोले उमेश कुशवाहा; संजय झा के प्रस्ताव का समर्थन
जदयू का नाम 'जनता दल नीतीश' करने को लेकर पार्टी में मांग अब काफी तेज हो चुकी है। संजय झा के प्रस्ताव पर अब उमेश सिंह कुशवाहा ने भी मुहर लगा दी है। एक्स पर उमेश कुशवाहा ने लिखा, 'उमेश सिंह कुशवाहा ने एक्स पर लिखा ‘जेडीयू मतलब नीतीश कुमार..’

जनता दल (यूनाइटेड) का नाम बदलकर 'जनता दल नीतीश' करने पर अब पार्टी के लगभग सभी बड़े नेता एक सुर में बोलने लगे हैं। JDU का नाम JDN करने का प्रस्ताव पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने रखा था और अब बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने भी संजय झा का खुलकर समर्थन कर दिया है। उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा है कि इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं है। उमेश सिंह कुशवाहा ने अपने एक्स हैंडल पर संजय झा के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी बात रखी है।
उमेश सिंह कुशवाहा ने एक्स पर लिखा 'जेडीयू मतलब नीतीश कुमार..खगड़िया में आयोजित ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पार्टी के नाम को राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के नाम से जोड़ने को लेकर जो भावना व्यक्त की है, वह जद (यू) के प्रत्येक कार्यकर्ता के अंतर्मन की अभिव्यक्ति है। विकास पुरुष आदरणीय नीतीश कुमार जी हमारी पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं और वही हमारी सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्हीं के अथक परिश्रम, संघर्ष और खून पसीने से हमारी पार्टी सींची गई है।
इससे पहले जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा के एक वायरल वीडियो में उन्हें यह कहते सुना गया था कि पार्टी का अस्तित्व और पहचान नीतीश कुमार की वजह से है और उसकी विचारधारा उनके राजनीतिक दर्शन पर आधारित है। उन्होंने पार्टी का नाम 'जदयू-नीतीश' करने पर विचार करने की बात कही थी। उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और मंत्री श्रवण कुमार से जब इस बारे में पूछा गया था तो दोनों नेताओं ने इसका समर्थन किया था। ये दोनों समता पार्टी के समय से ही नीतीश के करीबी रहे हैं। नालंदा के कुर्मी समुदाय से आने वाले श्रवण कुमार ने इस पर कहा था कि इससे बेहतर प्रस्ताव हो ही नहीं सकता। दोनों नेताओं ने जल्द औपचारिक प्रस्ताव लाने की मांग की थी और कहा था कि यह सर्वसम्मति से पारित होगा।
2003 में जदयू का हुआ था गठन
बता दें कि जदयू का गठन 2003 में शरद यादव के नेतृत्व वाले जनता दल यूनाइटेड और समता पार्टी के विलय से हुआ था। शरद यादव 2016 तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, जबकि नीतीश कुमार को पार्टी का वास्तविक नेता माना जाता रहा। 2016 में नीतीश राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और 2017 में शरद यादव अलग हो गए। नीतीश ने 2020 में अध्यक्ष पद छोड़ा और आरसीपी सिंह अध्यक्ष बने। केंद्र में मंत्री बनने को लेकर विवाद के बाद आरसीपी सिंह की जगह राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को अध्यक्ष बनाया गया। 2023 में ललन सिंह के इस्तीफे के बाद नीतीश फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए। अप्रैल 2026 में दो दशक तक मुख्यमंत्री रहने के बाद नीतीश ने पद छोड़ा, राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और उनके पुत्र निशांत नई भाजपा नीत सरकार में मंत्री बने।


