
तस्करी के माल लदे दो ट्रक थाने से गायब हो गए, बिहार में गजब हुआ
दारोगा उमाशंकर सिंह ने एफआईआर में कहा है कि थाना का कोई सरकारी भवन नहीं होने के कारण मोतीपुर चीनी मिल के पुराने भवन में थाना संचालित हो रहा है। मिल के खुले मैदान में जब्त गाड़ियों को रखा जाता है।
बिहार के एक थाने से दो ट्रक गायब हो गए। इन ट्रकों पर तस्करी के माल लदे थे। थाने से दो ट्रकों के गायब होने पर हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल जीएसटी चोरी कर तस्करी के माल से लदे जब्त किए गए दो ट्रक मोतीपुर थाना परिसर से गायब हो गए। दारोगा उमाशंकर सिंह के आवेदन पर माल समेत ट्रक चोरी की बीते दो जनवरी को एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें दोनों ट्रक के अज्ञात चालक व मालिक यूपी के संतकबीर नगर, खलीलाबाद के बरदहिया बाजार, वार्ड 11 के अजय तिवारी व गोरखपुर के काकुपार निवासी विमल तिवारी को नामजद आरोपित बनाया गया है। चार दिनों से गायब यूपी नंबर के दोनों ट्रकों की पुलिस ने तलाश तेज कर दी है। उनके मालिकों से संपर्क भी साधा है।
दारोगा ने आवेदन में बताया है कि जीएसटी के अधिकारियों ने बीते 31 दिसंबर को माल लदे तीन ट्रकों को जब्त किया था। इन्हें मुजफ्फरपुर से उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा था। जीएसटी के वैध कागजात नहीं देने के कारण तीनों ट्रकों को जब्त कर अधिकारियों ने मोतीपुर थाने की पुलिस को सौंप दिया था। तीनों ट्रकों की जब्ती सूची बनाकर जीएसटी के सहायक आयुक्त ने पुलिस को दे दी थी। आग्रह किया गया था कि अगले आदेश तक इन ट्रकों को पुलिस अपने अभिरक्षा में रखे। इसी बीच दो जनवरी की अहले सुबह थाना से दोनों ट्रक थाना परिसर से गायब पाए गए।
दारोगा उमाशंकर सिंह ने एफआईआर में कहा है कि थाना का कोई सरकारी भवन नहीं होने के कारण मोतीपुर चीनी मिल के पुराने भवन में थाना संचालित हो रहा है। मिल के खुले मैदान में जब्त गाड़ियों को रखा जाता है। ट्रक संख्या यूपी-53 ईटी 1421 और यूपी-53 डीटी 1358 को उसके चालक और मालिक ने मिलीभगत करके रात दो से तीन बजे के बीच में अंधेरा व कोहरे का लाभ उठाकर गायब कर दिया।
करजा में बालू लदे ट्रक को पुलिस ने छोड़ दिया था
जब्त ट्रकों के गायब होने का मामला जिले में नया नहीं है। इससे पहले करजा, सदर और अहियापुर थाने की अभिरक्षा से ट्रक गायब हो चुके हैं। करजा में बालू लदे ट्रकों को खनन विभाग की टीम ने जब्त किया था। इन ट्रकों को थाना के दारोगा ने चालक व मालिक से मिलीभगत कर थाने से छोड़ दिया था। मामला सुर्खियों में आया तो ट्रकों के गायब होने का केस बनाया गया। लेकिन, खनन अधिकारियों ने मामले में संज्ञान लिया तो तत्कालीन दारोगा पर कार्रवाई हुई थी।





