
पीएम सम्मान, केसीसी से बिहार के हजारों किसान वंचित होंगे? फार्मर रजिस्ट्री की राह में कई रोड़े
संयुक्त जमाबंदी होने से किसान निबंधन कराने में किसानों को मुश्किल हो रही है। उन्हें शिविर से लौटा दिया जा रहा है। किसान अंचल का चक्कर काट रहे हैं।
बिहार के भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा के आदेश पर बिहार में किसानों का निबंधन(फार्रमर रजिस्ट्री) का काम चल रहा है। लेकिन संयुक्त जमाबंदी होने से किसान निबंधन कराने में किसानों को मुश्किल हो रही है। उन्हें शिविर से लौटा दिया जा रहा है। किसान अंचल का चक्कर काट रहे हैं। दरअसल, अब एलपीसी, किसान सम्मान निधि, केसीसी या कृषि योजना के लिए किसान निबंधन को अनिवार्य कर दिया गया है।
किसानों का आरोप है कि संयुक्त जमाबंदी को अलग करने के लिए खुद प्रक्रिया जटिल है। इस काम के लिए अमीन अधिक पैसे मांगते हैं। अंचल कार्यालय में भी उन्हें दौड़ाया जा रहा है। कई बार किसानों से जमाबंदी अलग करने के लिए घूस की भी मांग की जाती है। नहीं देने पर बहाने बनाकर टाल दिया जाता है। इस कारण किसान परेशान हैं।
70% लघु किसान का ही हो रहा निबंधन
मुजफ्फरपुर के कुढ़नी के केरमा में चल रहे किसान निबंधन शिविर में कार्यरत कृषि समन्वयक अखिलेश कुमार विद्यार्थी ने बताया कि यहां 70 फीसदी लघु किसान का निबंधन हो रहा है, क्योंकि जमाबंदी में आवेदक किसान का नाम है। ये किसान एक कट्ठा से लेकर दस कट्ठा जमीन वाले हैं। वहीं, मध्यम या सीमांत किसानों में महज 30 फीसदी ही आ रहे, जिनके नाम की जमाबंदी है। इनमें 70% की जमाबंदी आज भी उनके मृत पिता, दादा के नाम से है या नाम में अंतर आ रहा है। इनका निबंधन नहीं हो पा रहा है।
नहीं खुल रहा पोर्टल
हरिशंकर मनियारी पंचायत में नौ गांव हैं। उसमें हरिशंकर मनियारी का पोर्टल नहीं खुल पाया है, जिससे एक भी किसान निबंधन नहीं हो सका है। किसान विपलेन्द्र कुमार ने बताया कि तीन दिनों से आकर लौट रहे हैं।
पिता के नाम की जमीन दो भाइयों में नहीं बंटी
कांटी शहबाजपुर के शैलेन्द्र कुमार शाही ने बताया कि उनके स्वर्गीय पिता राम एकबाल शाही के नाम से ही पूरी जमीन की जमाबंदी है। सर्वे के दौरान छोटे भाई ब्रजेश शाही और मैंने जमीन बंटवारे का आवेदन दिया था। अभी दोनों के नाम से जमाबंदी नहीं बनी। किसान निबंधन कराने गया तो पता चला कि पिता के नाम से जमाबंदी है इसलिए दोनों का निबंधन नहीं होगा। इससे हमे कृषि विभाग की योजनाओं से वंचित होना पड़ेगा।
अमीन मांग रहे शिड्यूल के नाम पर अधिक पैसे
केरमा के संजय कुमार व संतोष कुमार ने बताया कि हमलोगों को सामूहिक जमाबंदी दादा के नाम का है। इसका शिड्यूल बनाने को अमीन काफी पैसे मांग कर रहे हैं। सर्वे के समय जमा आवेदन में सभी का नाम और जमीन अलग-अलग चढ़ा दी गई है। उसी को आधार मानकर निबंधन कर देना चाहिए। वहीं, पुरुषोत्तमपुर के किसान अमरेश कुमार उर्फ बच्चा बाबू ने बताया कि 17 दिन अमीन रखकर प्रतिदिन 35 सौ रुपये दिया। उसके बाद शिड्यूल तैयार कराया पर आज तक नाम से जमाबंदी कायम नहीं हुई।
वहीं, पुरुषोत्तमपुर के किसान अमरेश कुमार उर्फ बच्चा बाबू ने बताया कि 17 दिन अमीन रखकर प्रतिदिन 35 सौ रुपये दिया। उसके बाद शिड्यूल तैयार कराया पर आज तक नाम से जमाबंदी कायम नहीं हुई।
सर्वे में जमा आवेदन बने निबंधन का आधार
मीनापुर शहजपुर के किसान नीरज कुमार सिंह ने बताया कि पिता के देहांत के बाद नाम सुधार के लिए जमीन के पूरे कागजात जमा कर चुका हूं, फिर भी जमीन मेरे नाम पर नहीं चढ़ा है। सर्वे के आवेदन को आधार बना कर निबंधन की सुविधा मिलनी चाहिए।

लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
और पढ़ें



