
राज्यसभा सीट पर बाप-बेटे में मतभेद; जीतनराम मांझी ने कहा- संतोष का बयान पार्टी का मामला
राज्यसभा सीट को लेकर बेटे संतोष सुमन की नसीहत वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जीतनराम मांझी ने कहा कि ये पार्टी का आंतरिक मामला है। जिसे आपस में बातचीत कर सुलझा लिया जाएगा। दरअसल मांझी ने कहा था कि अगर राज्यसभा सीट न मिले तो मंत्री पद ठुकरा देना चाहिए।
केंद्रीय एमएसएमई मंत्री सह हम सेक्युलर के संरक्षक जीतन राम मांझी ने कहा कि संतोष सुमन का बयान उनकी पार्टी का आतंरिक मामला है, जिसे आपस में बातचीत कर सुलझा लिया जायेगा। शनिवार को गांधी मैदान में नाबार्ड कार्यक्रम के बाद पत्रकारों ने उनसे इससे संबंधित सवाल पूछा था। हम सेक्युलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने शुक्रवार को गयाजी में जीतनराम मांझी के बयान पर उनसे उलट प्रतिक्रिया दी थी।
उन्होंने कहा था कि गठबंधन में सीटों का फैसला आपसी तालमेल और सबकी सहमति से होता है, न कि खुले मंच से मांग करने या मीडिया में चर्चा करने से। राज्यसभा की सीट कोई विषय ही नहीं है। किसी एक व्यक्ति के कहने से सीट नहीं मिल जाती। वहीं इससे पहले जीतनराम मांझी ने बिहार से राज्यसभा की एक सीट पर दावेदारी की थी। उन्होने नाराजगी भरे लहजे में अपने पुत्र और राज्य सरकार में मंत्री डॉ संतोष कुमार सुमन से कहा कि अगर राज्य सभा की सीट नहीं मिल रही है तो मंत्री पद का त्याग कर दीजिए।
मांझी ने कहा कि राज्यसभा में डॉ संतोष सुमन को जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने अपने पुत्र से कहा-‘तू छोड़ दा मंत्री पद का मोह। राज्यसभा सीट बंट गयी है। राज्यसभा की दो सीट भाजपा और दो सीट जदयू को मिल गयी। एक सीट लोजपा को मिली है। हम पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। जबकि भाजपा के बाद हम पार्टी का ही वोटिंग का प्रतिशत मजबूत है। इसके बावजूद हम पार्टी को वंचित रखा गया।
उन्होंने पार्टी अध्यक्ष से कहा कि आपको देश की राजनीति करनी है। इसके लिए खड़ा होकर मजबूती से काम कीजिए। हम पार्टी अगर मजबूत हो जाएगी तब हम कई मंत्री बना लेंगे। अपने बेटे के बारे में कहा कि डॉ. संतोष कुमार सुमन के पीछे जीतन मांझी केंद्रीय मंत्री खड़ा है। तैयारी करो और लक्ष्य को प्राप्त करो। उन्होंने साफ कहा कि अब मांग छोटी नहीं होनी चाहिए। भाजपा के बाद स्कोरिंग में आपकी ही पार्टी आगे है। आपकी तैयारी 100 सीट की होनी चाहिए। 100 सीट के टिकट की मांग करनी चाहिए। साथ में यह भी कहना चाहिए कि 100 सीट दीजिएगा तो साथ है नहीं तो इंकलाब जिंदाबाद।





