आकस्मिक फंड से पेंशन तो विकास का पैसा कहां से आएगा? तेजस्वी ने सम्राट सरकार से पूछा टेढ़ा सवाल
तेजस्वी यादव ने सम्राट सरकार से सवाल किया है कि अगर सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान लाभार्थियों को आकस्मिक निधि (Contingency Fund) से किया जा रहा है, तो विकास कार्य के लिए चल रही परियोजनाओं के लिए सरकार पैसा कहां से लाएगी?
बिहार में विधवा, बुजुर्ग और दिव्यागों को हर महीने दी जाने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए आकस्मिक फंड से राशि की निकासी पर सियासी हंगामा मचा हुआ है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने हाल ही में आरोप लगाया कि बिहार सरकार का खजाना खाली हो चुका है, इसलिए पेंशन जैसे नियमित खर्चों के लिए आकस्मिक निधि से पैसा निकाला जा रहा है। अब तेजस्वी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए सरकार से टेढ़े सवाल शुरू कर दिए हैं। उन्होंने पूछा है कि आकस्मिक फंड से अगर पेंशन दी जा रही है, तो विकास के लिए चल रही योजनाओं का पैसा सरकार के पास कहां से आएगा?
तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को बयान जारी कर आरोप लगाया कि एनडीए की दिवालिया राजनीति और नेतृत्व के कारण खजाना खाली होने से बिहार में वित्तीय हालात अराजक हैं। घटता राजस्व, बढ़ता राजकोषीय घाटा, अत्यधिक कर्ज, भारी ब्याज अदायगी तथा खोखली एवं अदूरदर्शी नीतियों के कारण बिहार कंगाल होने के कगार पर है।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार को इसका जवाब देना होगा कि किन परिस्थितियों में सामान्य मासिक पेंशन देने के लिए आकस्मिक निधि का इस्तेमाल किया गया। पेंशनधारक और बुजुर्ग, माता-बहनें आपदा नहीं हो सकते, जिनके लिए आपदा राशि से भुगतान करना पड़े? सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या पेंशन कोई आकस्मिक खर्च है? ऐसे में विकास कार्यों और अन्य परियोजनाओं के लिए धनराशि कहां से आएगी? सरकार को वित्तीय संकट की सच्चाई स्वीकार कर, राज्यवासियों को स्पष्टता से इसका जवाब देना चाहिए।
सम्राट सरकार ने पेंशन भुगतान के लिए आकस्मिक निधि से निकाले 3662 करोड़
दरअसल, पिछले दिनों मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में बिहार आकस्मिकता निधि से 3662 करोड़ रुपये की निकासी को मंजूरी दी गई थी। सरकार ने कहा कि इस फंड का उपयोग सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत संचालित सभी 6 तरह की पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को मई, जून और जुलाई 2026 की राशि भुगतान में होगा।
इसके बाद 10 जून को जब मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों के खाते में पेंशन की राशि भेजी, तो आरजेडी हमलावर हो गई। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाए कि बिहार दिवालिया होने की कगार पर है, राज्य में वित्तीय आपातकाल की स्थिति पैदा होने वाली है। उन्होंने सम्राट कैबिनेट के उस फैसले पर आपत्ति जताई जिसमें मासिक पेंशन भुगतान के लिए आकस्मिक निधि से 3662 करोड़ रुपये की निकासी की गई। उन्होंने बिहार सरकार का खजाना खाली होने का दावा भी किया।
तेजस्वी ने कहा कहा कि आकस्मिकता निधि का उपयोग सरकार द्वारा किसी भी अप्रत्याशित संकट, प्राकृतिक आपदा या वित्तीय विपत्ति के समय जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। पेंशन जैसे नियमित और सामान्य खर्च के लिए आकस्मिक फंड का उपयोग होने लगे तो समझ जाना चाहिए कि वित्तीय हालात खतरनाक हो चुके हैं।
लेखक के बारे में
Jayesh Jetawatजयेश जेतावत एक अनुभवी, जुझारू एवं निष्पक्ष पत्रकार हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग एवं संपादन में महारत हासिल है। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। तकनीकी रूप से निपुण जयेश, तथ्यों की बारीकी से जांच कर समयसीमा के भीतर पाठकों तक सटीक खबरें एवं शोध-परक विश्लेषण पहुंचाते हैं। जनसरोकार के मुद्दे उठाना, पेशेवर नैतिकता का पालन करना, समाज एवं मानव कल्याण के प्रति जिम्मेदारी, इन्हें और भी योग्य बनाती है। भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ है। जटिल मुद्दों को पाठकों एवं दर्शकों तक आसान शब्दों में पहुंचाना इनकी खूबी है।
जयेश जेतावत मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद ईटीवी भारत में बतौर प्रशिक्षु समाचार संपादक के रूप में काम शुरू किया। फिर इंडिया न्यूज के डिजिटल सेक्शन में विभिन्न बीट कवर की। इसके बाद, वे2न्यूज में बतौर टीम लीडर तीन राज्यों की कमान संभाली। साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े, तब से यहां बिहार की खबरों को कवर कर रहे हैं। जयेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव इंडिया न्यूज चैनल और सी-वोटर रिसर्च एजेंसी में इंटर्नशिप भी की। पटना से प्रकाशित मैगजीन राइजिंग मगध में समसामयिक विषयों पर इनके लेख छपते रहे हैं। समाचार लेखन के अलावा जयेश की साहित्यिक पठन एवं लेखन में रुचि है, सामाजिक मुद्दों पर कई लघु कथाएं लिख चुके हैं।


