टेंडर घोटाला: IAS अभिलाषा और योगोश के खिलाफ सबूत नहीं, फरार संजीव हंस होंगे गिरफ्तार; SVU ने बताया
टेंडर घोटाला: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में फरार चल रहे दो अन्य अभियुक्तों संजीव हंस और पवन कुमार की भी गिरफ्तारी होगी। एसवीयू ने 27 मई को रिशुश्री को गिरफ्तार किया था। उसके बाद एक महीने के अंदर इस केस में चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी।

बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में SVU की जांच लगातार जारी है। इस बीच विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने स्पष्ट किया कि आईएएस अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर सहित अन्य किसी सरकारी अधिकारी पर टेंडर घोटाला में सीधे शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं। ईडी की रिपोर्ट में उन पर निजी व्यक्ति से लाभ उठाने का आरोप है, जिसकी जांच चल रही है। इसी आरोप में उनको राज्य सरकार के स्तर पर निलंबित किया गया है। यह भी कहा गया है कि चर्चित आईएएस संजीव हंस अभी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी होगी।
प्रेस वार्ता में एडीजी पंकज कुमार दाराद ने कहा कि ईडी ने जांच के दौरान रिशुश्री सहित कई पदाधिकारियों का बयान दर्ज किया है। इन बयानों में आईएएस अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश सागर का नाम आया है। उन पर रिशुश्री व अन्य से निजी लाभ लेने का आरोप है। इसके आधार पर दोनों अधिकारियों को दो बार नोटिस देकर बुलाया गया, पर कुछ कारणों से उनसे पूछताछ नहीं हो सकी। इसके उपरांत न्यायालय से अनुमति लेकर उनके आवास पर भी छापेमारी हुई, पर कुछ खास बरामद नहीं हो सका।
ईडी द्वारा दर्ज किए बयान में कुछ अन्य पदाधिकारियों को भी इंगित किया गया है, लेकिन उसको लेकर पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। राज्य सरकार ऐसे मामलों में उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने पर निर्णय लेगी।
दागी अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही होगी
एसवीयू के एडीजी पंकज कुमार दराद ने प्रेस वार्ता ने बताया कि टेंडर घोटाले से संबंधित यह मामला 05/2025 ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा भेजे गये परिवाद पत्र के आधार पर दर्ज किया गया था। इसमें प्रारंभिक रूप से रिशुश्री, संजीव हंस, पवन कुमार और संतोष कुमार को नामजद सहित कई अज्ञात सरकारी पदाधिकारी व कर्मियों को अभियुक्त बनाया गया था।
एसवीयू की जांच के बाद मुमुक्षु कुमार चौधरी, तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह को भी अप्राथमिकी अभियुक्त बनाते हुए उनके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई है। टेंडर घोटाले में कई अन्य सरकारी पदाधिकारियों के नाम शामिल होने के सवाल पर एडीजी ने कहा कि चार्जशीटेड अभियुक्तों के अलावा फिलहाल अन्य किसी भी सरकारी पदाधिकारी के विरुद्ध मुकदमा चलाने लायक समुचित साक्ष्य उपलब्धनहीं हैं।
प्रवर्तन निदेशालय के परिवाद पत्र में उन पर लगे आरोपों के आधार पर ऐसे पदाधिकारियों के विरुद्ध राज्य सरकार के स्तर पर विभागीय कार्यवाही संचालित की जायेगी। प्रेस वार्ता में एसवीयू के डीआईजी विकास कुमार, एसपी जेपी मिश्रा, लॉ ऑफिसर राजीव कुमार और केस के आईडी चंद्रभूषण मौजूद रहे।
ईडी ने सीधे सरकार को नहीं भेजी रिपोर्ट, इसलिए हुई देर
पंकज कुमार दाराद ने केस दर्ज करने से लेकर कार्रवाई में हुई देरी पर कहा कि ईडी के द्वारा सीधे जांच एजेंसी को रिपोर्ट भेजे जाने की वजह से यह विलंब हुआ। केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से अपनी रिपोर्ट सरकार को भेजी जानी चाहिए थी। लेकिन, यह रिपोर्ट जांच एजेंसी को भेजी गयी। एसवीयू ने मामले को राज्य सरकार के संज्ञान में दिया। इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लग गया। इस बीच रिशुश्री गिरफ्तारी पर रोक लगाने को हाईकोर्ट चला गया।
गिरफ्तारी से रोक हटते ही की गई कार्रवाई
18 मई 2026 को रिशुश्री की गिरफ्तारी पर लगी रोक हटते ही एसवीयू ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में फरार चल रहे दो अन्य अभियुक्तों संजीव हंस और पवन कुमार की भी गिरफ्तारी होगी। गौर हो कि एसवीयू ने 27 मई को रिशुश्री को गिरफ्तार किया था। उसके बाद एक महीने के अंदर इस केस में चार्जशीट दाखिल कर दी गयी।


