प्रशांत किशोर को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, जज ने कहा- जन सुराज पार्टी चाहे तो हाईकोर्ट जाए

Feb 06, 2026 01:30 pm ISTNishant Nandan लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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प्रशांत किशोर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम ने कहा कि किसी को भी चुनाव हारने के बाद अदालत का सहारा नहीं लेना चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि अगर जनता आपको नकार दे तो लोकप्रियता पाने के लिए अदालत का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

प्रशांत किशोर को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, जज ने कहा- जन सुराज पार्टी चाहे तो हाईकोर्ट जाए

बिहार चुनाव को रद्द करने की प्रशांत किशोर की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर को फटकार लगाई है। देश की सर्वोच्च अदालत ने प्रशांत किशोर की याचिका पर कहा है कि जनसुराज पार्टी चाहे तो हाईकोर्ट जाए। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा है कि महिलाओं को सहायता के लिए राशि दी गई थी। पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग उचित नहीं है।

चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बिहार विधानसभा चुनाव- 2025 रद्द करने और राज्य में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की थी। दाखिल याचिका में बिहार सरकार पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को 10,000 रुपये हस्तांतरित करके आदर्श संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

प्रशांत किशोर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम ने कहा कि किसी को भी चुनाव हारने के बाद अदालत का सहारा नहीं लेना चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि अगर जनता आपको नकार दे तो लोकप्रियता पाने के लिए अदालत का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

अदालत ने प्रशांत किशोर की याचिका पर कहा कि आप वापस पटना हाईकोर्ट जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी से पूछा कि आपकी राजनीतिक पार्टी को कुल कितने वोट मिले? लोग आपको नकारते हैं तो आप न्यायिक मंच का इस्तेमाल करते हैं। बिहार चुनाव रद्द कराने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप एक ही याचिका में पूरा चुनाव रद्द करने की बात कर रहे हैं, जबकि इसकी योग्यता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने जनसुराज की अर्जी को खारिज करते हुए इसपर सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत के कड़े रुख को देखते हुए जनसुराज ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी अर्जी वापस ले ली है।

इस याचिका में कहा गया था कि निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद-324 (सभी चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने और उनके संचालन की निगरानी, निर्देशन एवं नियंत्रण करने) तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत राज्य में चुनाव के दौरान राज्य में 25-35 लाख महिला मतदाताओं को 10,000 रुपये सीधे धन हस्तांतरण के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

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लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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