
सुपौल : वीरपुर मॉडलिंग रिसर्च सेंटर में लापरवाही, लाखों की लकड़ी सड़कर जमींदोज
वीरपुर में मॉडलिंग रिसर्च सेंटर के निर्माण के दौरान सिंचाई विभाग द्वारा काटी गई लकड़ी की नीलामी नहीं होने के कारण लाखों रुपये की कीमती लकड़ी खुले में सड़ रही है। 2020 में काटी गई लकड़ी अब जंगल में बदल गई है। स्थानीय लोग बताते हैं कि नीलामी नहीं होने से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
वीरपुर, एक संवाददाता। मॉडलिंग रिसर्च सेंटर के निर्माण के दौरान सिंचाई विभाग द्वारा काटी गई लाखों रुपये की कीमती लकड़ी नीलामी नहीं होने के कारण खुले आसमान के नीचे सड़कर जमींदोज हो रही है। कोशी बराज निर्माण के समय वीरपुर में करीब 20 एकड़ जमीन पर केंद्रीय कर्मशाला बनाई गई थी, जहां मशीनों और उपकरणों का रखरखाव होता था। समय के साथ यह कर्मशाला बंद होकर कबाड़ में तब्दील हो गई। इसी परिसर में आम, शीशम, सीरीस, शिमल सहित हजारों पेड़ लगे थे, जिन्हें वर्ष 2020 में मॉडलिंग रिसर्च सेंटर निर्माण के लिए काटा गया। इन पेड़ों की लकड़ी को शीर्ष कार्य प्रमंडल परिसर में रख दिया गया, जहां अब उन पर जंगल उग आए हैं और आम लोगों का जाना भी मुश्किल हो गया है।
स्थानीय सुनील कुमार, जयशंकर आजाद और बच्चा यादव बताते हैं कि सैकड़ों हाइवा से लकड़ी ढोकर लाई गई थी, लेकिन वर्षों से नीलामी नहीं होने के कारण अब वह सड़ने लगी है। इससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं, कोशी कॉलोनी के सड़क किनारे और आवासीय इलाकों में लगे पुराने और सूखे पेड़ भी खतरा बने हुए हैं। विभाग इन्हें कटवा तो रहा है, लेकिन नीलामी न होने से राजस्व की लगातार क्षति हो रही है। जबकि मॉडलिंग रिसर्च सेंटर बनकर तैयार है और जनवरी में मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटन की तैयारी जोरों पर है। बावजूद इसके, कटी लकड़ी का अब तक कोई ठोस उपयोग या नीलामी नहीं हो सकी है। शीर्ष प्रमंडल वीरपुर के ईई बबन पांडे ने बताया कि नीलामी की प्रक्रिया जटिल होने के कारण कठिनाई हो रही है। सहायक अभियंता पवन कुमार सिंह ने कहा कि कई पेड़ बेहद पुराने और सूखे थे, इसलिए खतरे को देखते हुए कटवाना पड़ा। फॉरेस्टर रविरंजन के अनुसार, पेड़ों के रखरखाव पर वन विभाग का नियंत्रण नहीं है, लेकिन कटाई और परिवहन पर वन नियम लागू होते हैं।

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