सुपौल : स्थापना के दो दशक बाद भी अवर निबंधन कार्यालय को भवन नहीं

Feb 04, 2026 10:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सुपौल
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त्रिवेणीगंज में अवर निबंधन कार्यालय पिछले दो दशकों से भवन की कमी से जूझ रहा है। लोग घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं और बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। डिजिटल सेवाएं भी बंद रहती हैं, जिससे पारदर्शिता में कमी आई है। आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सुपौल : स्थापना के दो दशक बाद भी अवर निबंधन कार्यालय को भवन नहीं

त्रिवेणीगंज, निज प्रतिनिधि। अवर निबंधन कार्यालय को पिछले दो दशकों से ज्यादा होने के बाबजूद आज तक एक अदद भवन नहीं मिल सका है। प्रति वर्ष सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाला यह कार्यालय पहले किराये के मकान में, जबकि बिगत कई वर्षों से अनुमंडल कार्यालय के भवन के कुछ कमरों में किसी तरह संचालित हो रहा है। भवन और पर्याप्त जगह के अभाव में निबंधन कराने आने वाले आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। अनुमंडल कार्यालय परिसर में पहले से ही अनुमंडल पदाधिकारी,अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति कार्यालय, सहकारिता कार्यालय, आरडब्लूडी कार्यालय सहित कई विभाग संचालित हैं।

ऐसे में अवर निबंधन कार्यालय के लिए न तो समुचित स्थान उपलब्ध है और न ही जमीन खरीद बिक्री के लिए आये लोगो को बैठने की पर्याप्त व्यवस्था। भीड़ अधिक होने पर लोगों को घंटों खड़ा रहना पड़ता है, जिससे खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।चौकाने वाली बात है कि इस कार्यालय में पेयजल की भी व्यवस्था नही है। वहीं सरकार की महत्वाकांक्षी मे आई-हेल्प-यू सेवा, जो निबंधन प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाने के लिए शुरू की गई थी, उसमे अधिकतर समय ताले में बंद लटके रहते है। फलस्वरूप निबंधन की पूरी प्रक्रिया कातिब और ऑपरेटर के भरोसे चल रही है, जिससे व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठने के साथ ही लोगो को निर्धारित डर से अधिक राशि देने पड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि अवर निबंधन कार्यालय को अपना भवन मिल जाए तो न सिर्फ जनता को राहत मिलेगी बल्कि सरकारी राजस्व संग्रह और डिजिटल व्यवस्था भी अधिक प्रभावी हो सकेगी। अपना भवन व परिसर नही होने और सीमित जगह के कारण निबंधन कराने आए आम लोगों कोअपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं होने से आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा प्रदत्त डिजिटल सुविधा के लिहाज से मे आई हेल्प यू काउंटर की शुरुआत की गई थी लेकिन यह बंद रहने से निबंधन प्रक्रिया कातिब व ऑपरेटर के हाथों में सिमट गई है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। निबंधन कार्यालय में बने सार्वजनिक शौचालय औरमूत्रालय के उचित रखरखाव व साफ सफाई के अभाव में इससे बदबू आती रहती है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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