सुपौल : वीर लोरिक महोत्सव का आगाज, कलाकारों ने बांधा समा

Dec 10, 2025 01:40 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सुपौल
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सुपौल के हरदी स्थित वन देवी दुर्गा मंदिर में वीर लोरिक महोत्सव का आगाज हुआ। विधायक और अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। महोत्सव के दौरान वीर लोरिक की जीवनी पर चर्चा हुई और सरकारी योजनाओं के स्टॉल का अवलोकन किया गया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा।

सुपौल : वीर लोरिक महोत्सव का आगाज, कलाकारों ने बांधा समा

सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता। सदर प्रखंड अंतर्गत हरदी स्थित वन देवी दुर्गा मंदिर परिसर में मंगलवार को तीन दिवसीय वीर लोरिक महोत्सव का आगाज हो गया। कला संस्कृति एवं युवा विभाग तथा जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन पिपरा विधायक रामविलास कामत, त्रिवेणीगंज विधायक सोनम रानीख् एमएलसी डॉ. अजय कुमार सिंह, डीएम सावन कुमार, डीसीसी सारा अशरफ सहित अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके साथ ही स्मारिका का विमोचन किया गया। इस दौरान मंच पर उपस्थित जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन के अधिकारी को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इससे पूर्व सभी ने मां वन देवी दुर्गा की पूजा अर्चना की।

दर्शन किया। साथ ही महोत्सव स्थल पर स्थापित प्रतिमा वीर लोरिक और बैंगठा स्थल के भी दर्शन किए। इसके बाद विभिन्न विभागों द्वारा सरकारी योजनाओं से संबंधित विभिन्न विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल का अवलोकन किया। सबसे पहले एडीएम सच्चिदानंद सुमन ने वीर लोरिक का समाज के प्रति योगदान के साथ उनकी जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि वीर लोरिक का जीवन शक्ति, प्रेम, न्याय और संस्कृति का अद्भुत प्रतीक है। उन्होंने बताया कि वीर लोरिक द्वारा उठाया गया प्रसिद्ध पत्थर आज भी उत्तर प्रदेश में शक्ति और प्रेम की गवाही के रूप में मौजूद है। जहां बड़ी संख्या में लोग इसे देखने जाते हैं। कहा कि आज के समय में जब समाज अपनी जड़ों और परंपराओं से दूर होता जा रहा है, ऐसे महोत्सव हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि वीर लोरिक न्याय के रक्षक थे, उनके भीतर प्रेम और करुणा की भावना थी, और वे संस्कृति-संस्कार के संरक्षक थे। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि हम सभी उनके चरित्र से प्रेरणा लेकर समाज में व्याप्त अन्याय, असमानता और कुरीतियों जैसी चट्टानों को अपनी शिक्षा, कलम और अच्छे आचरण से तोड़ने का प्रयास करें। पिपरा विधायक रामविलास कामत ने कहा कि लोरिक महोत्सव सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक धरोहर को पुन: याद करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि वीर लोरिक गरीब, दबे-कुचले और वंचित वर्ग के रक्षक थे, जिनकी वीरता और न्यायप्रियता की कथाएं आज भी लोकगीतों और लोकनृत्यों के माध्यम से जीवित हैं। श्री कामत ने बताया कि वीर लोरिक की ताकत और साहस असाधारण था। उनकी वीरता, जीवन, व्यक्तित्व, कृतित्व, सिद्धांत, स्मृतियों, विरासत और प्रेरणादायक कहानियां मिथिलांचल और देश के सभी लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। हमने बचपन से ही उनकी गाथाएं सुनी हैं। हरदी की यह धरती मां वन देवी दुर्गा और लोरिक का कर्मभूमि रही है। हमारे पूर्वजों की कई यादें इस मिट्टी से जुड़ी हैं। सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से यह स्थल काफी महत्वपूर्ण है। इसे संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार लोरिक महोत्सव का आयोजन कर रही है। इससे क्षेत्र के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। एमएलसी डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि वीर लोरिक की वीरता की कहानी जन-जन में है। इसके बारे में सभी को पता है। कहा कि वीर लोरिक दुनिया में सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। वे दुनिया को अपना परिवार मानते थे। उन्होंने न्यायप्रिय और समतामूलक समाज की स्थापना कर सभ्यता और संस्कृति की रक्षा करने का कार्य किए। कहा कि उनकी वीरता को लोकगीत के माध्यम से दूर-दूर तक फैलाएं और ऐतिहासिक धरोहर को संजोएं। वह ईश्वर के समान थे। महोत्सव का आयोजन जिला प्रशासन की सजगता को दर्शाता है। कार्यक्रम में त्रिवेणीगंज विधायक सोनम सरदार ने भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम में डीएम सावन कुमान ने मैथिली में संबोधन कर श्रोताओं का मन मोहा। उन्होंने कहा कि वीर लोरिक के महानता के बिसरै के जरूरत नै छै, बल्कि हुनकऽ महान यश के प्रसार करै के जरूरत नै छै । अपने सब स आग्रह जे स्टॉल पर आबि सरकारी योजना के जानकारी ल क लाभ के लाभ उठाउ। ऐहिले वीर लोरिक महोत्सव मनाओल जाइत अछि, ई कार्यक्रम तीन दिन धरि चलत आ अलग-अलग दिन अलग-अलग कार्यक्रम प्रस्तुत होयत। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत प्रसिद्ध गायक कृष्ण चन्द्रवंशी ने गणेश वंदना से किया। गणेश वंदना ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद अपूर्वा प्रियदर्शी की गायिकी ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया। उन्होंने जय जय भैरवि असुर भयाउनि, जय जय भैरवि असुर भयाउनि, पशुपति भामिनी माया, सहज सुमति वर दियउ गोसाउनि, सहज सुमति वर दियउ गोसाउनि, अनुगति गति तुअ पाया, जय जय भैरवि असुर भयाउनि।। गायक कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया।

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