सुपौल : सदर अस्पताल प्रबंधन पार्किंग का विवाद सुलझाए या मरीजों का इलाज कराए
सुपौल, वरीय संवाददाता। जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में स्थायी पार्किंग नहीं होने से वाहनों

सुपौल, वरीय संवाददाता। जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में स्थायी पार्किंग नहीं होने से वाहनों के दबाव के कारण कई बार एंबुलेंस देरी से अस्पताल पहुंचती है। ऐसे में समय पर मरीजों के अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण कई बार मरीजों की असमय मौत भी हो जाती है। वहीं मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के बीच अपने निजी वाहन लगाने के दौरान विवाद और मारपीट तक की घटना हो जाती है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन के सामने मरीजों की जान बचाने से लेकर उनके परिजन के बीच पार्किंग को लेकर हुआ विवाद सुलझाने की भी समस्या खड़ी होती है।
इतनी ही नहीं अस्पताल प्रबंधन के सामने मरीजों का इलाज करना और परिजनों का विवाद सुलझाने की चुनौती होती है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन मरीजों का इलाज करे या फिर उनके परिजनों का विवाद सुलझाकर शांति व्यवस्था कायम करे, यह बड़ा सवाल है। इन सबका बस एकमात्र उपाय सदर अस्पताल में स्थायी पार्किंग की उपलब्धता ही है। अमूमन कई बार ऐसा होता है कि जिले के अलग-अलग इलाके से मरीजों के साथ आने वाले परिजन अपने निजी वाहन (चार पहिया या दोपहिया) से ही अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में जगह के अभाव और जल्दी से जल्दी अपने मरीज तक पहुंचने की होड़ में परिजन एक-दूसरे से उलझ जाते हैं। हालिया कई उदाहरण हैं, जब सदर अस्पताल में ड्यूटी पर तैनास सुरक्षा कर्मियों को परिजनों के बीच का विवाद सुलझाना पड़ा है। इतना ही नहीं कई बार तो मरीजों को लेकर अस्पताल आए स्थानीय ऑटो और टोटो चालक भी एंबुलेंस कर्मी व सुरक्षा कर्मियों से उलझते रहे हैं। सदर अस्पताल में स्थायी पार्किंग नहीं होने के कारण आएदिन अस्पताल परिसर में दोपहिया वाहन चालक अपने वाहन पार्क करने के लिए करीब तीन से चार-चार लाइन तक बना लेते हैं। ऐसे में अस्पताल आने वाले एंबुलेंस चालकों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जबकि तीन से चार लाइन में भी दोपहिया वाहन खड़े करने के बावजूद पार्किंग की समस्या का समाधान नहीं हो पाता है। गौरतलब है कि सदर अस्पताल में रोजाना औसतन करीब चार से पांच सौ मरीजों का इलाज ओपीडी में किया जाता है। जबकि इनडोर सेवा में भी सैकड़ों मरीज भर्ती होते हैं, जिनके परिजन भी उनसे मिलने दूर-दराज से आते हैं। ऐसे में सदर अस्पताल में वाहनों का हुजूम लग जाता है। इसके अलावा दर्जनों चार और तीन पहिया वाहनों से भी मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। जांच कराकर जल्द घर लौटने के कारण ऐसे मरीजों को लाने वाले वाहन अस्पताल के मुख्य द्वार के अंदर बेतरतीब तरीके से पार्क कर दिये जाते हैं। कोट......वाहनों की पार्किंग को लेकर कई बार मरीजों के परिजनों के बीच विवाद और मारपीट तक की नौबत आ चुकी है। अस्पताल के सुरक्षा कर्मी बीच-बचाव कर उसे सुलझाते हैं। अस्पताल में पार्किंग बन जाए तो इसका स्थायी समाधान हो। --अभिनव कुमार, प्रबंधक, सदर अस्पताल
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


