
सुपौल : सर्दी का सितम जारी, स्टेशनों पर यात्री झेल रहे दुश्वारी
सुपौल-सहरसा रेलखंड पर कड़ाके की ठंड ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घने कोहरे और शीतलहर के बीच ट्रेन का इंतजार करना कठिन हो गया है। नए स्टेशन भवन का हैंडओवर न होने से वेटिंग हॉल की सुविधा नहीं मिल रही है, जिससे यात्री परेशान हैं। रेलवे प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की जा रही है।
सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता। सुपौल-सहरसा रेलखंड पर कड़ाके की ठंड ने यात्रियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। सुबह-शाम घना कोहरा और शीतलहर के बीच स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करना अब किसी परीक्षा से कम नहीं रहा। खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री और मरीज सबसे ज्यादा परेशान नजर आ रहे हैं। स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत नया भवन बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन हैंडओवर नहीं होने से अब तक यात्रियों की एंट्री शुरू नहीं हो पाई है। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि वेटिंग हॉल की सुविधा नहीं मिल पा रही। ठंड में खुले प्लेटफॉर्म पर बैठकर घंटों ट्रेन का इंतजार करना यात्रियों की मजबूरी बन गई है।
कई यात्री अपने बैग या चादर बिछाकर जमीन पर ही बैठते दिख रहे हैं। प्लेटफॉर्म संख्या की हालत और भी बदतर है। यहां यात्रियों के बैठने के लिए लगाई गई कई कुर्सियां भी टूटी हुई हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बीमार यात्रियों को खड़े रहकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ यात्रियों का कहना है कि सर्दी की वजह से कई लोग खांसी, बुखार और बदन दर्द की शिकायत करने लगे हैं। यही नहीं प्लेटफॉर्म पर ही गड्ढे बन गये हैं जो यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इस रेलखंड पर फिलहाल 17 से 18 जोड़ी ट्रेनों का परिचालन हो रहा है। रोजाना हजारों यात्री इस मार्ग से सफर करते हैं, जिनमें नौकरीपेशा, छात्र, मरीज और ग्रामीण इलाके के लोग शामिल हैं। लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में सफर का अनुभव लगातार खराब होता जा रहा है। यात्रियों का कहना है कि अगर नए भवन में जल्द एंट्री शुरू कर दी जाए और वेटिंग हॉल खोल दिया जाए तो काफी राहत मिल सकती है। साथ ही प्लेटफॉर्म पर टूटी कुर्सियों की मरम्मत और ठंड से बचाव के लिए अस्थायी इंतजाम किए जाने चाहिए। लोगों ने रेलवे प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है, ताकि सर्दी के इस मौसम में यात्रियों को कम से कम सम्मानजनक इंतजार की सुविधा मिल सके।

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