
सुपौल : वीरपुर कोर्ट में न बाउंड्री न गहन जांच-पड़ताल
वीरपुर व्यवहार न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नदारद है, जबकि यह संवेदनशील सीमा क्षेत्र में स्थित है। न्यायालय परिसर में न तो बाउंड्री वॉल है और न ही प्रवेश पर सघन जांच। हाल ही में बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जिससे अधिवक्ताओं ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
वीरपुर, एक संवाददाता। इंडो-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे वीरपुर व्यवहार न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नदारद है। संवेदनशील सीमा क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद न तो न्यायालय परिसर में बाउंड्री वॉल है और न ही प्रवेश पर कोई सघन जांच व्यवस्था। हालात यह हैं कि हजारों लोगों का आना-जाना बिना किसी रोक-टोक के होता है, जो गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है। वर्तमान में व्यवहार न्यायालय एक अस्थायी भवन में संचालित हो रहा है। वहीं, निर्माणाधीन स्थायी भवन में भी चारदीवारी का प्रावधान नहीं किया गया है। हाल ही में कुनौली बॉर्डर के रास्ते एक महिला सहित पांच बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ और उनकी एसएसबी द्वारा गिरफ्तारी ने इलाके की संवेदनशीलता को और उजागर कर दिया है।
नेपाल सीमा से सटे होने के कारण यह क्षेत्र अवैध गतिविधियों का केंद्र माना जाता है। ऐसे में न्यायालय की खुली सुरक्षा व्यवस्था चिंता बढ़ा रही है। उल्लेखनीय है कि जनवरी 2026 में सुपौल समेत बिहार के कई सिविल कोर्टों को बम से उड़ाने की ईमेल धमकियां भी मिल चुकी हैं। व्यवहार न्यायालय विधिक संघ के अध्यक्ष श्याम नारायण मिश्रा ने बताया कि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ एक हवलदार और तीन पुलिसकर्मी तैनात हैं। अधिवक्ताओं ने तत्काल पुख्ता सुरक्षा इंतजाम की मांग की है।

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