सुपौल : सूखे नशे की गिरफ्त में युवा, इंडो-नेपाल सीमा पर बढ़ रहीं आपराधिक घटनाएं

हिन्दुस्तान, सुपौल
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वीरपुर के सीमाई इलाके में युवा सूखे नशे की लत में लिपट रहे हैं, जिससे चोरी-छिनतई और अन्य आपराधिक गतिविधियों में वृद्धि हो रही है। प्रशासनिक बैठकों और छापेमारी के बावजूद नशे का नेटवर्क नहीं टूट रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जागरूकता और रोजगार के माध्यम से इस समस्या का समाधान जरूरी है।

सुपौल : सूखे नशे की गिरफ्त में युवा, इंडो-नेपाल सीमा पर बढ़ रहीं आपराधिक घटनाएं

वीरपुर, एक संवाददाता। सीमाई इलाके के युवा लगातार सूखे नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। नतीजा यह है कि इंडो-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर लगातार चोरी-छिनतई, लूट समेत अन्य आपराधिक वारदात बढ़ रहे हैं। इसका खामियाजा स्थानाय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। वहीं सीमाई इलाके में युवाओं में बढ़ रही सूखे नशे की लत से समाज के लोगों समेत प्रशासनिक अधिकारी भी चिंता में हैं।

नशे की लत के बढ़ते मामले

गौरतलब है कि गांव से लेकर शहर तक इसकी पहुंच लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा असर युवाओं के भविष्य, सामाजिक व्यवस्था और अपराध के ग्राफ पर दिखाई देने लगा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार हो रही प्रशासनिक बैठकों और छापेमारी के बावजूद नशे का नेटवर्क पूरी तरह टूट नहीं पा रहा है। जानकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि हाल के वर्षों में चोरी, मारपीट, लूट और अन्य आपराधिक घटनाओं में बढ़ोतरी के पीछे सूखा नशा एक बड़ा कारण बनता जा रहा है।

कम उम्र के युवाओं पर असर

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि कम उम्र के छात्र और युवा तेजी से इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। नशे की लत के कारण युवा मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और गलत संगत की ओर बढ़ रहे हैं। बीते गुरुवार को नेपाल एपीएफ ब्रिगेड नंबर-1 के कमांडर डीआईजी मनीष थापा ने सीमावर्ती भनटाबारी और श्रीपुर क्षेत्र का दौरा किया। वहीं इससे पूर्व एसएसबी डीआईजी पूर्णिया मधुकर अभिताभ ने भी सीमावर्ती इलाकों का निरीक्षण कर ग्रामीणों एवं जिला प्रशासन के साथ बैठक की थी।

प्रशासनिक उपाय और बैठकें

इसके अलावा बिहार सरकार के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत और डीजीपी विनय कुमार ने भी वीरपुर पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। लगातार एसएसबी, स्थानीय प्रशासन और नेपाल प्रशासन के बीच बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों में एक प्रमुख मुद्दा बिहार एवं सीमा क्षेत्र में फैल रहे सूखा नशा पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर रहा। एसपी शरथ आरएस के नेतृत्व में जिले में इस माह भारी मात्रा में सूखा नशा की बरामदगी हुई है, जिसे प्रशासन की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

नशे के गिरोहों का सक्रिय होना

गुरुवार को रतनपुरा क्षेत्र में 83 किलो गांजा बरामद किया गया। हालांकि दूसरी ओर सीमा क्षेत्र में जगह-जगह एसएसबी की तैनाती, मद्य निषेध विभाग और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता के बावजूद युवाओं में नशे का बढ़ता प्रचलन चिंता बढ़ा रहा है। सूत्रों के अनुसार वीरपुर के कुमार चौक, बसंतपुर, बनेलीपट्टी, भीमनगर, भगवानपुर, रतनपुरा तथा सीमावर्ती अररिया जिले के बसमतिया और बेला इलाके में कई गिरोह सक्रिय हैं। बताया जा रहा है कि ये गिरोह पहले युवाओं को नशे का आदी बनाते हैं और बाद में उन्हें इस अवैध कारोबार से जोड़ देते हैं।

स्थानीय अभिभावकों की चिंता

स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि छोटी-मोटी कार्रवाई तो होती है, लेकिन बड़े नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई नहीं होने से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। सीमावर्ती इलाकों में नशे के आदी युवाओं के इलाज और पुनर्वास के लिए सरकारी स्तर पर पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। वीरपुर और बसमतिया में निजी नशामुक्ति केंद्र जरूर संचालित हो रहे हैं, लेकिन वहां बढ़ती मरीजों की संख्या और महंगी फीस लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।

समस्या का स्थायी समाधान

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए जागरूकता अभियान, स्कूल-कॉलेजों में काउंसलिंग, युवाओं को रोजगार और खेल-कूद जैसी सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना बेहद जरूरी है। इस बाबत डीएसपी वीरपुर सुरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रशासन लगातार सक्रिय है और सूखा नशा के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि गुरुवार को रतनपुरा में 80 किलो गांजा बरामद किया गया है। आज भी सभी थाना अध्यक्षों के साथ इस मुद्दे पर बैठक की गई है। सूखा नशा के गिरोह को ध्वस्त करना हमारी पहली प्राथमिकता है। जो भी इनपुट मिलते हैं, उस पर त्वरित कार्रवाई की जाती है।

सामान्य प्रश्न

सीमाई इलाके में युवाओं में सूखा नशा बढ़ने के क्या कारण हैं?
जानकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि हाल के वर्षों में चोरी, मारपीट, लूट और अन्य आपराधिक घटनाओं में बढ़ोतरी के पीछे सूखा नशा एक बड़ा कारण बनता जा रहा है।
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