चरखा केंद्र में 33 सालों से लटका ताला, खुले तो सैकड़ों को मिलेगा रोजगार

Nov 22, 2025 10:52 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सुपौल
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करजाईन बाजार के बौराहा पंचायत में 1992 में स्थापित चरखा केंद्र ने ग्रामीणों को रोजगार के अवसर दिए थे। लेकिन 9 साल बाद यह बंद हो गया। अब 33 साल बाद भी लोग इसे फिर से खोलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। स्थानीय निवासियों का मानना है कि केंद्र खुलने से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

चरखा केंद्र में 33 सालों से लटका ताला, खुले तो सैकड़ों को मिलेगा रोजगार

करजाईन बाजार, एक संवाददाता ग्रामीण इलाकों के लोगों को रोजगार दिलाने को लेकर साल 1992 में राघोपुर प्रखंड क्षेत्र की बौराहा पंचायत में खादी ग्राम उद्योग के तहत चरखा केंद्र की स्थापना की गई थी। इसको लेकर स्थानीय ग्रामीणों के बीच जबरदस्त उत्साह दिखा था। सैकड़ों ग्रामीणों ने इस कार्य को सीखने को लेकर अपनी दिलचस्पी जाहिर की थी। केंद्र में ट्रेनरों के द्वारा सूत काटने, बुनने और करघा चलाने के गुर सिखाए जाते थे। वहीं प्रशिक्षण के बाद पुरुषों के साथ-साथ सैकड़ों महिलाओं ने भी इस कार्य के जरिए खुद को आत्मनिर्भर बनाया। लेकिन, महज नौ साल बाद विभागीय उदासीनता के कारण चरखा केंद्र पर ताला लटक गया।

तकरीबन 33 साल बीत जाने के बावजूद अब भी सैकड़ों ग्रामीण चरखा केंद्र खुलने के सपने संजोए हुए हैं। स्थानीय निवासी सतेन्द्र साह, भविलाल मुखिया, नारायण साह, महेन्द्र साह, विश्वनाथ मंडल, महेन्द्र साह, मणिलाल साह, कपिलेश्वर साह, बिंदेश्वरी लाल दास, परमानंद लाल दास, बच्चे लाल साह, ननकी देवी, भगीलाल मुखिया, गुलो देवी, महावीर देवी, विद्या देवी, इंद्रा देवी आदि लोगों का कहना है कि चरखा केंद्र खुलने से सैकड़ों लोगों को रोजगार के अवसर मिले थे। इससे होने वाली कमाई के जरिए उनलोगों का परिवार खुशहाल हो गया था। परिवार के लोगों का पलायन रुक गया था। भविष्य उज्ज्वल दिख रहा था। लेकिन, अचानक चरखा केंद्र पर ताला लटकने के कारण उन लोगों का सपना धूमिल हो गया। रोजगार खत्म होते ही लोग पलायन करने को मजबूर हो गए। पैसे के अभाव में काम सीखने के बावजूद हुनर का उपयोग नहीं कर सके। कई बार जिम्मेदार पदाधिकारियों को चरखा केन्द्र खुलवाने की अपील की। लेकिन हर बार संबंधित पदाधिकारी टालमटोल करते रहे। लोगों का कहना है कि चरखा केंद्र खुलने से सैकड़ों लोगों के बीच रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। स्थानीय लोगों ने संबंधित पदाधिकारियों से जांच कर जल्द चरखा केंद्र चालू कराने की गुहार लगाई है। तकरीबन 10 लाख की लागत से बना था चरखा केन्द्र बौराहा पंचायत के वार्ड 9 में स्थित चरखा केन्द्र को स्थापित करने में उस समय तकरीबन 10 लाख रुपए की लागत का अनुमान बताया जाता है। चरखा केंद्र तकरीबन डेढ़ कट्ठा जमीन में फैला हुआ था। लोगों की मानें तो केंद्र में 20 चरखा और 6 करघा लगाए गए थे। केंद्र पर महिलाओं और पुरुषों को इस कार्य के गुर सिखाने को लेकर प्रशिक्षण दिया जाता था। इस बीच लोगों को केंद्र पर काम करने के एवज में अच्छी रकम का भुगतान भी होता था। भवन अतिक्रमित, केंद्र से सामान भी गायब चरखा केन्द्र बौराहा का भवन जर्जर हो गया है। इनमें रखे कई सामान जंक के भेंट चढ़ गए। वहीं कई सामान गायब हो गए हैं। वहीं खाली भवन को लोगों ने अतिक्रमित कर लिया है। बुधवार को पड़ताल के दौरान चरखा केंद्र में जलावन सहित कई अन्य सामान रखे मिले। हालांकि इस बीच लोगों ने बताया कि अब भी भवन में कुछ मशीन जर्जर हालत में बचे हुए हैं। इनकी भी सुनिये............. दिनेश कुमार मेहता का कहना है कि बौराहा पंचायत में चरखा केंद्र फिर से खुल जाने पर लोगों को गांव में ही रोजगार मिल जाएगा बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। -22novsup4 दीपक मंडल का कहना है कि हमारे पिताजी लोग भी इस चरखा केंद्र में काम कर चुके हैं। उस समय चरखा केंद्र पर अच्छी खासी कमाई हो जाती थी। जिससे परिवार का भरण पोषण अच्छी तरह हो जाता था। -22novsup5 कपिलेश्वर मलिक का कहना है कि उस समय में चरखा केंद्र पर महिला और पुरुष को मशीन चलाने के लिए सिखाया भी जाता था। और कपड़ा बुनकर बाहर सेल किया जाता था। जिससे लोगों को अच्छी खासी आमदनी हो जाती थी। -22novsup8 मुन्ना भगत का कहना है कि 33 साल से चरखा केंद्र बंद पड़ा हुआ है। अगर समय रहते चालू कर दिया जाए तो लोगों को बहुत बड़ी रोजगार का साधन मिल जाएगा। -22novsup9 गुड्डू राण का कहना है कि अचानक चरखा केंद्र पर ताला लग जाने से लोगों का सपना धूमिल हो गया। अभी भी लोग आस लगाए हुए है कि अगर चरखा केंद्र खुल जाए तो रोजगार के अवसर मिल जाएंगे। -22novsup10 संजय गोईत का कहना है कि केंद्र पर ट्रेनरों के द्वारा सूत काटने , बुनने और करघा चलाने का गुरु सिखाए जाते थे। अफसोस है कि केंद्र में तीन दशक से भी ज्यादा समय से ताला लटका है। -22novsup11 उपेंद्र सहयोगिया का कहना है कि हमारे क्षेत्र में चरखा केंद्र लोगों के लिए रोजगार का बहुत अच्छी साधन है। जिसमें महिला पुरुष दोनों मिलकर काम कर सकते हैं। इस योजना को विभागीय उदासीनता ने लील लिया। -22novsup12 शंकर राणा का कहना है कि बौराहा पंचायत में चरखा केंद्र खुलने को लेकर विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है। लेकिन विभागीय अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं। -22novsup13 अभिलाष कुमार झा का कहना है कि जिस समय चरखा केंद्र खुला था उसे समय हम लोगों के पूर्वज के द्वारा काफी मशक्कत के बाद इतनी बड़ी केंद्र का संचालन करवाया गया था। लेकिन 9 वर्ष केंद्र चलने के बाद ताला लटक गया। जिससे लोगों में काफी नाराजगी है। -22novsup14 प्रदीप कुमार मेहता ने कहा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। जल्द से जल्द चरखा केंद्र खुले ताकि लोगों को गांव में ही रोजगार मिल सके। -22novsup15 मोतीपुर पंचायत के मुखिया रामचंद्र राम ने कहा कि कई वर्षों से चरखा केंद्र का स्थिति बाद से बदतर हो चुका है। जिसको लेकर हम लोग जिला प्रशासन के पास जाएंगे और जिला अधिकारियों से आग्रह करेंगे कि जल्द से जल्द इस केंद्र को खुलवाया जाए ताकि लोगों को रोजगार मिले। -22novsup16 शंकर डागा का कहना है कि हमारे क्षेत्र के लिए चरखा केंद्र एक अदभुत केंद्र है जो कहीं-कहीं है ।इस तरह का चरखा केंद्र अगर चालू हो जाए तो इस गांव के लिए एक मिल का पत्थर साबित हो जाएगी। जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा। -22novsup17 बोले जिम्मेवार इतनी बड़ी समस्या है, क्षेत्र में हमको मालूम नहीं था। अब मालूम हुआ है तो इसके बारे में विभागीय अधिकारियों को अवगत कराकर इसे अतिशीघ्र चालू करवाया जाएगा। -पप्पी देवी, जिला परिषद क्षेत्र संख्या 16........................................22novsup3 प्रस्तुति : पवन कुमार

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