DA Image
14 अगस्त, 2020|8:49|IST

अगली स्टोरी

काम बंद होने से दो जून की रोटी जुटाना भी बड़ी चुनौती

काम बंद होने से दो जून की रोटी जुटाना भी बड़ी चुनौती

रोज कमाने, रोज खाने वाले लोग लॉकडाउन में सबसे ज्यादा परेशान हैं। किसी के घर का चूल्हा कर्ज के पैसे से जल रहा है तो कहीं बीमारी के इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। यह लोग किसी न किसी की मदद के इंतजार में हैं। बीएसएस कॉलेज रोड सहित शहर की झुग्गी-झापेड़ी में रह रहे गरीब-मजदूरों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना चुनौती बन गई है।स्टेशन परिसर से विस्थापित होकर इस्लामपुर में बसे ज्यादेतर रिक्शा-ठेला और दिहाड़ी मजदूरी कर अपना घर चलाते थे। लेकिन लॉकडाउन में काम बंद होने से इन लोगों के सामने राशन जुटाना और बच्चों का भरण पोषण करना चुनौती है। इनके सामने एक अनिश्चितता भी है जो परेशानी का सबब है। कब तक स्थिति सामान्य होगी इसकी चिंता है। श्यामनगर के झकस पासवान, विनो पासवान, बच्चेलाल पासवान, पप्पू पासवान, प्रमोद सरदार, नीरज पासवान, उपेन्द्र ऋषिदेव, जोगिंदर ऋषिदेव, दिलचंद ऋषिदेव, महुआ के मो. बशीर, पथरा के गणेश पासवान, मो. रहमान आदि ने बताया कि एक महीने से एक रुपया कमाई नहीं हुआ है। पाई-पाई के लिए मोहताज हैं, किसी इतने दिन घर चलाए लेकिन अब मुश्किल हो रहा है।मदद की तलाश में मजबूरन घर से निकलते हैं: इस्लमापुर स्थित शहरी गरीबों के लिए बने आवास में फिलहाल 30 से 40 परिवार हैं। इसमें कुछ रिक्शा-ठेला चलाते हैं तो कुछ मजदूर भी हैं। कुछ महिलाएं चूल्हा-चौका कर परिवार चलाने में मदद करती थी। लेकिन लॉकडाउन में वह भी छूट गया है। श्यामा, ललिता, रामजानकी, लीला देवी आदि ने बताया कि घरों में ऐसे में रोजाना सड़कों पर किसी मदद की आस में निकलते हैं कि दो वक्त की रोटी जुटा पाए। कभी मदद मिल जाती है लेकिन हमेशा नहीं मिलती है। अगर ऐसा ही रहा तो परिवार के सामने भूखमरी की समस्या खड़ी हो जाएगी। सरकार जल्दी हम गरीब-मजदूरों के लिए कोई उपाय करे नहीं तो हालत और खराब हो जाएगी। लॉकडाउन के बाद पहली बार गुरुवार को निर्माण कार्य में जुटे मजदूर । हिन्दुस्तान

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Raising of bread on June 2 is also a big challenge