अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बसों में छत पर भी बैठाते हैं यात्री

राज्य भर में अलग-अलग जगहों पर बस हादसे में सवारियों की मौत के बाद भी जिले की सड़कों पर बसों के परिचालन में लापरवाही और नियमों की अनदेखी हो रही है। इतना ही नहीं बसों में धड़ल्ले से क्षमता से अधिक सवारियों को बैठाने के साथ सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है।

सुपौल बस स्टैंड से पटना, दरभंगा, सहरसा, मुजफ्फरपुर, अररिया, पूर्णिया आदि जगहों के लिए रोजाना सौ से अधिक बसें खुलती हैं। बस संचालक अधिक कमाई के चक्कर में नियम-कानूनों की धज्जी उड़ा रहे हैं। बसों का हाल ऐसा बना रखा है कि बसों की यात्रा जानलेवा बन गयी है।

सही रूप में सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने पर यात्री भगवान भरोसे यात्रा करने को मजबूर हो रहे हैं। निजी वाहन मालिक की ओर से अधिक मुनाफा कमाने को लेकर बसों में सुविधा के मामले में कटौती करते जा रहे हैं। इतना ही नहीं जिस रूट में कम बसें चलती हैं उसमें सवारियों को भेड़-बकरियों की तरह यात्रियों को भरा जाता है।

न तो फर्स्ट एड न ही अग्निशामक : जिले और जिले के बाहर चलने वाली बसों में नब्बे प्रतिशत में सिर्फ एक ही दरवाजा है। अधिकांश बसों में एक ही दरवाजे से यात्री अंदर-बाहर करते हैं। कई बसों में तो आपातकालीन खिड़की भी नहीं रहती है। 60 प्रतिशत से अधिक बसों में फर्स्ट एड की व्यवस्था नहीं है जबकि मानक के मुताबिक यह सुविधा हर हाल में रखी जानी है।

इतना ही नहीं शायद ही किसी बस में अग्निशामक यंत्र मिलेगा। ऐसे में अगर कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

शहर के मल्लिक चौक के पास मंगलवार को यात्रियों को भरकर ले जा रही एक बस।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Passengers on the roof also sit in the buses