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पहली सोमवारी के लिए सजधज कर तैयार हैं शिवालय

पहली सोमवारी के लिए सजधज कर तैयार हैं शिवालय

सावन शुरू होते ही शिवालयों में बोलबम के नारों से वातावरण भाक्तिमय होने लगा है। शिवभक्तों का मानना है कि पहली सोमवारी का जलाभिषेक अपने आप में एक अलग महत्व रखता है। सोमवारी के दिन जलाभिषेक को लेकर शहर तथा ग्रामीण क्षेत्रों के सभी शिवालय सज-धज कर तैयार हो चुके हैं। शहर के स्टेशन चौक स्थित शिव मंदिर, ठाकुरवाड़ी शिव मंदिर, सुखपुर स्थित बाबा तिल्हेश्वर नाथ मंदिर, बरुआरी के कपिलेश्वरनाथ मंदिर आदि जगहों पर जलाभिषेक के लिए खास तैयारी की गयी है।

पहले सोमवार के महत्व को देखते हुए मंदिर को सजाने का काम रविवार शाम तक पूरर कर लिया गया। खासकर बाबा तिल्हेश्वर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाजा गया है। इस मंदिर में हर साल सावन के महीनों में पूजा अर्चना के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। खासकर प्रत्येक सोमवार को 50 हजार से अधिक श्रद्धालु चल चढ़ाते हैं। तिल्हेश्वर मंदिर कमेटी के सचिव और तंत्राचार्य अरूण मुन्ना बताजे हैं कि करीब पांच हजार कांवरिया गंगा और कोसी बराज से जल भरकर बाबा तिल्हेश्वर नाथ को चढ़ाते हैं। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष रमणचंद देवज्ञ ने बताया कि मंदिर का रंग रोगन और सजावट की सभी तैयारी पूरी कर ली गयी है। इस बार मंदिर के प्रवेश द्वार पर एलईडी गेट लगाया गया है। मंदिर कमेटी के तरफ से दर्शनिया चौक से लेकर मंदिर तक सड़क किनारे साफ-सफाई करायी गयी है। इसके अलावा मंदिर परिसर धूप और बारिश से बचने के लिए शेड का निर्माण, श्रद्धालु को पीने के लिए शुद्ध पेयजल आदि की व्यवस्था की गयी है। सुबह 4 बजे से शाम 6 बजे तक श्रद्धालु जलाभिषेक कर सकते हैं। इसके बाद शाम साढ़े 6 बजे से रात साढ़े 10 बजे तक शृंगार होगा।

इसमें करीब तीन हजार श्रद्धालु शामिल होंगे। हालांकि मंदिर जाने वाले रास्ते में नृसिंह मंदिर से काली मंदिर तक सड़क पर जमजमाव होने से श्रद्धालुओं को गंदे पानी से गुजरना पड़ेगा। उधर, सड़क चौड़ीकरण नहीं होने से इस बार महजाम लगेगा और श्रद्धालुओं को जाम से जूझना पड़ेगा। जलाभिषेक के लिए अलग-अलग बैरेकेटिंग किये गये हैं।

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