Over 321 000 Women Join Chief Minister s Employment Scheme in Supaul सुपौल : जिले में 50% महिलाओं ने 10 हजार की राशि से शुरू की सिलाई, Supaul Hindi News - Hindustan
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सुपौल : जिले में 50% महिलाओं ने 10 हजार की राशि से शुरू की सिलाई

सुपौल में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से 3 लाख 21 हजार 429 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। उन्हें रुचि अनुसार काम करने के लिए पहली किस्त में 10 हजार रुपए मिले हैं। महिलाएं सिलाई, पशुपालन, किराना स्टोर और...

Newswrap हिन्दुस्तान, सुपौलThu, 9 Oct 2025 02:25 AM
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सुपौल : जिले में 50% महिलाओं ने 10 हजार की राशि से शुरू की सिलाई

सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले की 3 लाख 21 हजार 429 महिलाएं मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़ चुकी हैं। उन्हें अपनी रुचि के अनुसार काम करने के लिए पहली किस्त के तौर पर उनके खातों में दस-दस हजार रुपए मिल गए हैं। बीते 6 अक्टूबर को जिले की करीब 18 हजार से अधिक दीदियों को पहली किस्त की 10 हजार राशि दी गयी। इसके पहले दो चरणों में 26 सितंबर और 2 अक्टूबर को यह राशि भेजी गयी थी। जीविका के जिला कार्यक्रम प्रबंधक दीपक कुमार यादव ने बताया कि 40 फीसद महिलाओं ने ग्रामीण इलाकों में शृंगार शॉप के लिए राशि ली है।

इसके बाद सिलाई-कढ़ाई का काम करने और पहले से चल रहे सिलाई सेंटर को बढ़ाने के लिए राशि ली है। वहीं, लगभग 12 फीसदी महिलाएं बकरी, पशुपालन करेंगी। जबकि, अन्य जीविका दीदियों ने किराना स्टोर, सब्जी की खेती, ग्रोसरी शॉप सहित अन्य रोजगार करेंगी। बताया कि छह माह के बाद उनके कारोबार को देखते हुए चरणबद्ध तरीके से दो लाख की राशि दी जाएगी। इससे वे अपने कारोबार को बढ़ा सकेंगी। यह राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि उन महिलाओं के लिए एक नई शुरुआत है। जीविका डीपीएम ने बताया कि जिले में 3 लाख 55 हजार 555 महिलाएं जिले के विभिन्न जीविका समूह से जुड़ी हुई हैं। इनमें से 3 लाख 42 हजार महिलाओं का डाटा अपलोड हो चुका है। शेष का डेटा अपलोड करने का काम चल रहा है। महिलाओं के जीवन में दिख रहा बदलाव : मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़कर अब महिलाएं अपनी रुचि के अनुसार स्वरोजगार कर रहीं हैं। जीविका ने पहले ही महिलाओं को समूह से जोड़कर कई नूतन प्रयोग किए हैं। वे काफी सफल भी रहे हैं। दीदी का हाट, अस्पतालों में दीदी की रसोई, प्रखंड मुख्यालयों में दीदी की कैंटीन काफी लोकप्रिय हो रही है। इसके अलावा मछल्ी उत्पादन भी जीविका समूह की महिलाएं कर रही हैं। अब तो प्रखंडों में सिलाई सेंटर खोलकर महिलाओं को इससे जोड़कर उन्हें रोजगार दिया जा रहा है। जीविका के डीपीएम दीपक यादव और संचार प्रबंधक विवेक महाजन कहते हैं कि यह योजना महिलाओं के सपनों को साकार करने का सबसे बड़ा संबल बन रही है। चरणबद्ध तरीके से उनकी योजना के मुताबिक दो लाख 10 हजार रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे गांवों में हाट बाजार विकसित होने का एक बेहतर माहौल बनने लगा है। जो कल तक काम की तलाश में शहरों को रुख करती थीं। वे महिलाएं अब अपने ही घरों में रहकर कई तरह के काम कर खुद को स्वाबलंबी बना रही हैं। इससे दीदियों के जीवन में आ रहा बदलाव दिख रहा है। वे आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बन रही हैं। 30 हजार 789 जीविका समूह बने हैं जिले में: जिले के सभी 11 प्रखंडों 30 हजार 789 जीविका समूह बने हुए हैं। प्रत्येक समुह से दस दस महिलाएं जुड़ी हुई हैं। महिलाएं जीविका के माध्यम से समृद्ध और आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्हें जीविका के माध्यम से किसी न किसी छोटे बड़े कारोबार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा जिले में 2167 ग्राम संगठन हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिले में 1 लाख 25 हजार 656 लखपति दीदियां हें जो पहले से रोजगार कर रही हैं।

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