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सुपौल : नेपाल में पटरी पर लौटी जिंदगी, भंसार दफ्तर खुला

सुपौल : नेपाल में पटरी पर लौटी जिंदगी, भंसार दफ्तर खुला

संक्षेप:

नेपाल में जनांदोलन के बाद कोसी बराज का भंसार कार्यालय पूरी तरह बंद था, जिसे अब फिर से खोला गया है। शनिवार को मालवाहक वाहनों की लंबी लाइनें लगी रहीं, लेकिन रविवार को कम भंसार हुआ। व्यापारियों ने स्थिति...

Sep 14, 2025 11:23 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सुपौल
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सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता। नेपाल में जनांदोलन के बाद से कोसी बराज के भंसार कार्यालय को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया था। शुक्रवार से नेपाल प्रशासन ने कच्चे समानों के लिए भंसार को खोला था। वहीं रविवार को भंसार कार्यालय को पूर्ण रूप से खोल दिया गया। शनिवार को जहां मालवाहक वाहनों की लंबी लाइन नेपाल में जाने के लिए सीमा पर लगी रहीं, वहीं रविवार पूरे दिन मालवाहक गाड़िया नेपाल में भारतीय सीमा से लगातार जाती रहीं। लगभग एक दर्जन से ऊपर कार एवं बाइक का भंसार भी हुआ है। नेपाल में स्थिति सामान्य होने से भंसार कार्यालय पर भीड़ लगी रही।

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भंसार कार्यालय पर कार्य कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि कोसी बराज भंसार कार्यालय से सामान्य दिनों में प्रतिदिन लगभग 50 से 60 कार, सैकड़ों बाइक एवं मालवाहन वाहनों का भंसार होता रहता था लेकिन रविवार को पहले की अपेक्षा काफी कम भंसार हुआ है। स्थिति धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। आगामी दिनों में बेहतरी की उम्मीद है। नेपाल के डॉ. निरंजन कुमार ने बताया कि बेरोजगारी और भ्रष्टाचार ने युवा आंदोलन को जन्म दिया। आम जनता और शासक वर्ग के बीच आर्थिक विषमता भी बनी आंदोलन की बड़ी वजह बनी। इसके अलावा रविवार को इनरवा, झुमका, इटहरी, दुहबी, धरान, भारदह, राजविराज आदि इलाके में स्कॉल कॉलेज भी खुले लेकिन रविवार को बच्चों की उपस्थिति कम रही। उधर, काठमांडू और पोखरा जैसे दूरगामी मार्गों पर यातायात साधन चालू हो गये जिससे नागरिकों को राहत मिल गई। नेपाल सरकार के तानाशाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ काठमांडू से चले हिंसक आंदोलन की चपेट में भारत के सीमा क्षेत्र से सटे नेपाल के कस्बे भी आ गए थे। आंदोलन के कारण भारतीय कस्बे से सटे नेपाल के भंटाबाड़ी, इनरवा, इटहरी, दुहबी का बाजार पूरी तरीके से बंद हो गया था। व्यापार चौपट हो गया था। हिंसक आंदोलन के बाद जब नेपाली सेना ने शासन व्यवस्था की बागडोर संभाली और नेपाल में कफ्र्यू की घोषणा की इससे नेपाल के बाजारों में सन्नाटा पसर गया था। शनिवार से नेपाली बाजार के व्यापारियों ने दुकानों को खोलना शुरू किया लेकिन ग्राहक नदारद रहे। रविवार को बाजार के खुलने पर चहल पहल रही, पहले की अपेक्षा ग्राहक तो बाजार में नहीं पहुंचे लेकिन दुकानों के खुलने से रौनक रही। व्यापारियों ने स्थिति सामान्य होने का दावा करते हुए ग्राहकों से आने की अपील कर रहे हैं। इटहरी के व्यापारी विजय खेमका, संजू पोखरेल ने बताया कि बाजार पूरी तरीके से खुले हैं लेकिन ग्राहक अभी भी नहीं पहुंच रहे हैं। एक-दो दिनों में स्थिति सामान्य हो सकती है। दुहबी के कपड़ा व्यवसायी विजय रॉय ने बताया कि नेपाल में आंदोलन होने की वजह से व्यापारियों को काफी नुकसान हुआ है। बाजार तो खुल गया है लेकिन एक-दो ग्राहक पहुंच रहे हैं। भंटाबाड़ी के व्यापारी श्रीराम ने बताया कि ग्राहक न आने के कारण व्यापारियों में निराशा है लेकिन अगर बाजार खुलता रहा तो ग्राहक जरूर आएंगे। व्यापारियों ने बाजार के सामान्य होने का दावा करते हुए ग्राहकों को नेपाल के मार्केट में आने को कहा है।