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सुपौल : नेपाल जाने से कतराने लगे हैं लोग, असुरक्षा के भय से कर रहे किनारा

सुपौल में निजी ट्रेवल्स उद्योग पर नेपाल में उपजे संकट का प्रभाव दिखने लगा है। केवल दो दिनों में 400 पर्यटकों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी है। बुकिंग रद्द करने वालों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।...

Newswrap हिन्दुस्तान, सुपौलThu, 11 Sep 2025 05:06 AM
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सुपौल : नेपाल जाने से कतराने लगे हैं लोग, असुरक्षा के भय से कर रहे किनारा

सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता। पड़ोसी देश नेपाल में उपजे संकट का निजी ट्रेवल्स उद्योग पर सीधा असर पड़ने लगा है। महज दो दिनों में ही 400 पर्यटकों ने बुकिंग रद्द करा दी है। इन्होंने सितंबर की विभिन्न तिथियों पर वहां जाने का मन बनाया था। इसमें ज्यादातर ने टूर पैकेज ले रखे थे तो कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से जाने का मन बना रखा था। जानकारों की मानें तो बुकिंग रद्द कराने वालों की संख्या अभी और बढ़ेगी। बेहतरीन प्राकृतिक वादियों से घिरा नेपाल: क्षेत्रफल में छोटा होने के बावजूद पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। इसके अलावा भगवान बुद्ध, पशुपतिनाथ मंदिर, जनकपुर, आदि स्थलों के प्रति आस्था के कारण काफी संख्या में लोग वहां धार्मिक पर्यटन के लिए भी जाते हैं।

इसका भरपूर लाभ परिवहन (ट्रांसपोर्ट) से जुड़े जुड़े लोगों को मिलता है। कई टूर-ट्रैवेल एजेंसियां पैकेज भी देती हैं। हालिया बवाल के कारण लोग नेपाल में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसके कारण काफी संख्या में बुकिंग रद्द करा रहे हैं। इसका खासा असर स्वाभाविक रूप से सीमावर्ती जिलों के पर्यटन व्यवसाय पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। निजी ट्रांसपोर्ट से जुड़े खट्टर ने बताया कि कहीं कोई छोटी सी प्रतिकूलता का नकारात्मक असर पर्यटन व्यवसाय पर सबसे पहले पड़ता है। बताया कि सनातनियों में पशुपतिनाथ के दर्शन करते हैं। वे माता जानकी की जन्मस्थली की मान्यता के कारण वहां जनकपुर विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। इसका लाभ निजी ट्रेवल्स से जुड़े लोग उठाते हैं। नेपाल को भारत से कृषि यंत्र, हस्तशिल्प उत्पाद, साड़ी, ड्रेस मैटेरियल समेत लकड़ी के खिलौने, मेटल क्राफ्ट आदि का निर्यात होता है। मौजूदा संकट से इनसे जुड़े उद्यमी भी चिंतित हैं। निर्मली चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सह व्यापारी अभिषेक पंसारी ने कहा कि नेपाल की 65 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। वहां कृषि यंत्रों की अच्छी मांग रहती है। अब इनका ऑर्डर रुकने से पूंजी फंसने का खतरा बढ़ गया है। नेपाल के युवाओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए नेताओं की आलीशान जिंदगी पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। न्यूज पोर्टल्स के अनुसार 5 और 6 सितंबर को सोशल मीडिया पर नेपो किड्स और नेपो चाइल्ड जैसे हैशटैग तेजी से वायरल होने लगे। लोग नेताओं के बच्चों की महंगी कारें, ब्रांडेड कपड़े तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करके भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने लगे। इसी बीच नेपाल सरकार द्वारा फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब सहित कुल 28 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन के बाद युवाओं के विरोध-प्रदर्शन को लेकर नेपाल में अशांति पसर गई । युवाओं को लगा कि यह भ्रष्ट नेता देश छोड़ो मुहिम को कुचलने का प्रयास है। इसके बाद अचानक हिंसा प्रदर्शन बड़ा और उसकी आज पूरे नेपाल में फैल गई। हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कार्यालय, नेताओं के घर, राजनेता को भी निशाना बनाया।

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