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30 सितम्बर, 2020|11:45|IST

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लॉकडाउन: धंधा हुआ चौपट, रोजी-रोटी के लाले

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कोरोना महामारी से बचाव के लिए लागू लॉकडाउन समाज के निचले स्तर के लोगों पर मुसीबत का पहाड़ बनकर टूटा है। चाय, पान, सिलाई, कढ़ाई, सड़क किनारे ठेले पर चाट, समोसा, लिट्टी, जिलेबी बेचकर परिवार पालने वाले इससे काफी प्रभावित हुए हैं। अब तो स्थिति यह है कि यह अपनी पीड़ा किसी से कर पाने में भी असमर्थ हैं। हालांकि अपने और परिवार की भूख को मिटाने के लिए इस लॉकडाउन के बीच कुछ लोगों ने अपना कारोबार भी बदल दिया है। कुछ चाय, पान वाले अब सब्जी, फल बेचने लगे हैं।बाजार क्षेत्र के मेन रोड में सुरेंद्र गुप्ता पान की दुकान से इतनी कमाई कर लेता था कि परिवार का किसी तरह गुजर बसर हो जाता था। अब लॉकडाउन की वजह से 35 दिनों से पान दुकान पर ताला जड़ा है। दो वक्त की रोटी का जुगाड़ खत्म है। घर में चार बच्चे, पति-पत्नी और बीमार विधवा मां है। जमा पूंजी बैठ कर खा गए। राशन की दुकान से राशन भी मिला और राहत भी एक हजार रुपया मिला, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। सुरेंद्र के चेहरे पर हर वक्त मायूसी छाई रहती है। राशन के साथ मां की दवा का गुजर कहां से होगा इसी को सोच कर उसका दिन कट रहा है। ब्लॉक चौक पर महेश चाय की दुकान चलाता था। दिन भर में चार- पांच सौ की कमाई होने पर परिवार की दाल रोटी चल जाती थी। अब चाय की दुकान बंद है। घर में जमा पैसे भी खत्म हो गए हैं। पूछने पर बताता है कि जान पहचान वालों के साथ नाते-रिश्तेदारों से उधार पैसा मांग कर घर किसी तरह चल रही है। आगे अगर लॉकडाउन हटा तो ठीक, वरना भगवान ही मालिक हैं। मंगल बाजार की सलमा अपने बीमार पति के साथ घर के बाहर सिलाई कढ़ाई कर गुजर-बसर कर रही थी। बेटा बस स्टैंड में किरानी गिरी करता था। बस बंद होने से वह भी बेरोजगार हो गया। कपड़े की दुकान बंद होने से सिलाई कढ़ाई का काम बंद है। पूछने पर कहती है कि रमजान के महीने में जमा पूंजी से घर चल रहा है। आगे क्या होगा ये अल्लाह जाने। कमोबेश यही हालत ठेले पर चाट, समोसा, लिट्टी, जिलेबी बेचने वाले अनिल पासवान की है। वह ठेले पर चाट, समोसा, जिलेबी बेचकर गुजर-बसर कर परिवार चल रहा था। लेकिन कोरोना बीमारी ने उसके परिवार के पेट में लात मार दी। कुछ दिन पहले ठेले लगाने पर एक बार पुलिस की लाठी भी खा चुका है।