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21 सितम्बर, 2020|11:37|IST

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जीवन रक्षक दवा को फेंका गया

जीवन रक्षक दवा को फेंका गया

गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर 101 तरह की जीवन रक्षक दवा उपलब्ध करा रही है लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से इसका लाभ गरीबों को नहीं मिल पा रहा है। गरीबों के इलाज के लिए दी गई दवा का अस्पताल प्रबंधन क्या करता है, इसका नजारा सोमवार को देखने को मिला।

ताजा मामला अनुमंडलीय अस्पताल से जुड़ा है। मरीजों में मुफ्त वितरण के लिए आई जीवन रक्षक दवा को फेंकने के लिये ले जाने के क्रम में लोगों ने रविवार की शाम को पकड़ा। फेंकी जा रही दवा में आयरन की सिरप और स्लाइन की बोतलें थीं। लाखों की स्लाइन की बोतल तो एक्सपायर हो चुकी थी लेकिन आयरन की अधिकांश सिरप पर एक्सपायर डेट 2021 अंकित थी।

अनुमंडलीय अस्पताल को अपना भवन नहीं है। हाल ही में अस्पताल के भवन निर्माण के लिए टेंडर हुआ है। अस्पताल के नया भवन बनाने और पुराने जर्जर भवन को तोड़ने का काम चल रहा है। पुराने जर्जर भवन में जो दवा रखी गई थी, उसे कचरे में फेंकने के दौरान लोगो ने पकड़ लिया। स्वास्थ्य प्रबंधक प्रेमरंजन ने मामले में चुप्पी साध ली।

उधर, सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण मोहन प्रसाद ने बताया कि लोगों से मुझे इसकी जानकारी मिली है। मामले की जांच के लिये टीम गठित की गई है। रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई होगी।