सुपौल : कोसी नदी हर साल लिखती है तटबंध के अंदर के लोगों की जिंदगी-मौत की कहानी

हिन्दुस्तान, सुपौल
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पूर्वी कोसी तटबंध के अंदर हर साल बाढ़ से ढोली और बनैनिया पंचायत प्रभावित होती है। लोग विस्थापित होकर भी अपनी रोजी-रोटी के लिए तटबंध के अंदर खेती करने को मजबूर हैं। सरकारी सहायता का अभाव है, जिससे स्थिति और विकट हो गई है। कई लोगों की मौतें नाव दुर्घटनाओं में हो चुकी हैं।

सुपौल : कोसी नदी हर साल लिखती है तटबंध के अंदर के लोगों की जिंदगी-मौत की कहानी

सरायगढ़, सुशील कुमार। पूर्वी कोसी तटबंध के अंदर हर साल बाढ़ की विभीषिका से ढोली और बनैनिया पंचायत मुख्य रूप से और भपटियाही, लौकहा, सरायगढ़ आंशिक रूप से प्रभावित होती है। लेकिन पूर्वी कोसी तटबंध के अंदर के लोगों की जिंदगी और मौत की कहानी हर साल कोसी नदी ही लिखती है। कोसी जब भी उफान पर होती है, लोगों की नींद उड़ जाती है। कोसी के इस उफान मे हर साल कुछ लोग समाधि ले लेते हैं। यह कहानी चलती रहती है।

बाढ़ और विस्थापन

दरअसल समस्या यह है कि पूर्वी कोसी तटबंध के अंदर के लोग साल 2010 से ही विस्थापित होकर प्रखंड क्षेत्र के इर्द-गिर्द गांव पूर्वी कोसी तटबंध के स्पर, एनएच 57 के साइड में सहित अन्य जगहों पर बस गये हैं। लेकिन उनकी रोजी-रोटी का जरिया जमीन आज तटबंध के अंदर ही है ऐसे में लोग अपनी जान हथेली पर लेकर नाव की सवारी के लिए मजबूर हैं। सरकारी स्तर पर नाव की सुविधा नहीं रहने की वजह से लोग निजी नाव का सहारा लेते है। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि आज भी कोसी के विस्थापित भगवान भरोसे है और उनके जिंदगी और मौत की कहानी कोसी ही लिखती है। लोगों को रोजी-रोटी की समस्या को लेकर तटबंध के अंदर खेती करना मजबूरी हो गया है। लगभग 15 सालों से तटबंध के अंदर के लोग विस्थापित होकर पूर्वी कोसी तटबंध सहित स्पर पर शरण लिए हुए हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर इन लोगों को पुनर्वासित नहीं नहीं किया गया है। तो फिर आखिर रोजी-रोटी की समस्या को दूर करना अलग बात है।

सरकारी सहायता की कमी

इनके समक्ष विकट समस्या उत्पन्न हो गई है। बनैनिया और ढोली पंचायत से विस्थापित होकर भपटियाही बाजार के निकट शरण लिए हुए विस्थापित परिवार मो. इकबाल, मो.तस्लीम,मो.जुबेर, फुलेश्वर राम, दुलारी देवी, सुजाता देवी, योगेंद्र सरदार, लक्ष्मी राम,मुनीलाल राम,सहदेव सरदार, मोती राम सहित अन्य का कहना है। कि बनैनिया और ढोली पंचायत से विस्थापित होकर 15 साल पहले ही पूर्वी कोसी तटबंध के स्पर पर शरण लिए हुए है। सरकारी स्तर पर आज तक हम लोगों को किसी भी प्रकार की सुविधा नही मिली है। हमलोगो का जमीन जायदाद तटबंध के अंदर होने के कारण रोजी-रोटी की गंभीर समस्या हो रही है। हमलोग जान हथेली पर लेकर मजबूरी में तटबंध के अंदर खेती करने जाते हैं।

नाव दुर्घटनाएँ

वही ढोली पंचायत के मुखिया सरस्वती देवी,बनैनिया पंचायत के मुखिया श्याम यादव, लौकहा पंचायत के मुखिया महारानी देवी, भपटियाही पंचायत के मुखिया विजय कुमार यादव, सरायगढ़ पंचायत के मुखिया प्रमिला देवी का कहना है कि पुल नही बन सकता है। लेकिन लोगो के खेतीबाड़ी के लिए भी सरकारी स्तर पर नाव बहाल होना चाहिए। 27 मार्च 2020 को पूर्वी कोसी तटबंध के 21 किलोमीटर स्पर के कोढली घाट के पास नाव पलटने से कोढली गांव के वार्ड 3 के पूर्व सरपंच जामुन यादव के नाती राजू उर्फ मंगल कुमार, मो. अलाउद्दीन के पुत्री रौनक परवीन और कुशेश्वर ठाकुर की पुत्री अर्चना कुमारी लापता हो गए थे। 15 अप्रैल 2013 को लौकहा पंचायत के वार्ड तीन निवासी बिंदेश्वर साह के पुत्र अशोक कुमार साह और उसी गांव के शत्रुघ्न यादव के पुत्र किशोर यादव की मौत कोसी नदी में डूबने से हो गई थी। सरायगढ़ पंचायत के समाजसेवी सह मुखिया प्रतिनिधि सुखदेव पंडित का कहना है कि चिकनी गांव के पास कोसी नदी पार करने के क्रम में अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है। कई बार नाव दुर्घटना भी हुई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोसी नदी की बाढ़ से कौन सी पंचायतें प्रभावित होती हैं?
ढोली और बनैनिया पंचायत मुख्य रूप से प्रभावित होती हैं।
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