सुपौल : अवैध वाहनों की शहर में भरमार, बिना लाइसेंस दौड़ रहीं जुगाड़ गाड़ियां

Newswrap हिन्दुस्तान, सुपौल
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सुपौल में अवैध जुगाड़ गाड़ियां सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद इनका संचालन जारी है, जिसके कारण सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। प्रशासन से इन वाहनों पर रोक लगाने और प्रभावी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

सुपौल : अवैध वाहनों की शहर में भरमार, बिना लाइसेंस दौड़ रहीं जुगाड़ गाड़ियां

सुपौल, कार्यालय संवाददाता। जिला मुख्यालय से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक सड़कों पर अवैध रूप से दौड़ रही जुगाड़ गाड़ियां अब लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऐसे वाहनों के परिचालन पर रोक लगाए जाने के बावजूद जिले में इनका संचालन धड़ल्ले से जारी है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि प्रशासनिक स्तर पर न तो न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है और न ही इनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई होती दिखाई दे रही है।

सड़क दुर्घटनाओं का बढ़ता खतरा

परिणामस्वरूप सड़क सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और आए दिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा रही है। वहीं बिना रजिस्ट्रेशन और टैक्स के सड़कों पर दौड़ रहे इन वाहनों के कारण सरकार को भी राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में इन जुगाड़ वाहनों का उपयोग होता है।इन वाहनों में न तो सुरक्षा मानकों का पालन होता है और न ही चालक प्रशिक्षित होते हैं। कई बार क्षमता से अधिक लोगों को बैठाकर मुख्य सड़कों पर तेज रफ्तार में वाहन चलाए जाते हैं, जिससे हादसों की आशंका लगातार बनी रहती है। लोगों ने प्रशासन से अविलंब अभियान चलाकर अवैध जुगाड़ गाड़ियों पर रोक लगाने, नियमित जांच करने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

जुगाड़ गाड़ियों का अनियंत्रित संचालन

जिले के मुख्य बाजारों, कस्बों और ग्रामीण सड़कों पर बड़ी संख्या में जुगाड़ गाड़ियां बेखौफ दौड़ती नजर आती हैं। इनका इस्तेमाल सवारी ढोने के साथ साथ निर्माण सामग्री, कृषि उत्पाद, लकड़ी, ईंट, बालू तथा अन्य सामान ढोने में किया जाता है। कम लागत और अधिक भार वहन क्षमता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में इनका प्रचलन तेजी से बढ़ा है। हालांकि सुरक्षा मानकों की अनदेखी, तकनीकी खामियों और अनियमित संचालन के कारण इन वाहनों से हादसों की आशंका बढ़ी रहती है।

जुगाड़ गाड़ी की विशेषताएं

जुगाड़ गाड़ी मूल रूप से पारंपरिक ठेला या रिक्शा में डीजल इंजन लगाकर तैयार किया गया एक अस्थायी मालवाहक वाहन होता है। इसमें टेंपो की तरह ब्रेक, एक्सीलेटर और गियर जैसी व्यवस्था तो कर दी जाती है, लेकिन यह किसी भी मानक के अनुरूप नहीं होता। इन वाहनों का न तो परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन होता है और न ही इन पर कोई वैध नंबर प्लेट लगी होती है। इस वाहनों का बीमा भी नहीं रहता है। परिवहन विभाग के पास जिले में चल रही ऐसी गाड़ियों का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। बावजूद इसके, शहर से लेकर गांवों तक सड़कों पर इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर ग्रामीण इलाकों में ये वाहन परिवहन व्यवस्था का अनौपचारिक हिस्सा बन चुके हैं।

नाबालिग चालक और सुरक्षा की कमी

सबसे गंभीर पहलू यह है कि इन जुगाड़ गाड़ियों को चलाने वालों में बड़ी संख्या नाबालिगों की है। अधिकांश चालकों के पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस होता है और न ही यातायात नियमों की कोई जानकारी। कई बार ये वाहन ओवरलोड होकर संकरी सड़कों पर तेज रफ्तार में चलते देखे जाते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इन अवैध वाहनों के संचालन से सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। बिना रजिस्ट्रेशन, टैक्स और परमिट के चलने वाले ये वाहन नियमों को दरकिनार कर परिवहन व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। वहीं वैध परमिट और टैक्स देकर वाहन चलाने वाले छोटे व्यवसायी भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।

प्रशासन की कार्रवाई

डीटीओ डॉ संजीव कुमार सज्जन ने कहा कि जुगाड़ गाडियों को सीधा जब्त करने का प्रावधान है। हाल के दिनों में भी पिपरा में दो जुगाड़ गाड़ियां जब्त की गई हैं। जल्द ही विशेष अभियान चलाकर इन वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुपौल में जुगाड़ गाड़ियों का संचालन क्यों हो रहा है?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऐसे वाहनों के परिचालन पर रोक लगाए जाने के बावजूद जिले में इनका संचालन धड़ल्ले से जारी है।

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