सुपौल : राघोपुर में एफएमडी का कहर, परेशान पशुपालकों ने विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप

Newswrap हिन्दुस्तान, सुपौल
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राघोपुर प्रखंड क्षेत्र की बिशनपुर दौलत पंचायत में खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) बीमारी ने कहर बरपा रखा है। दर्जनों पशु इस गंभीर बीमारी की चपेट में हैं। पशुपालकों ने पशु चिकित्सा विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है और सरकार से शीघ्र टीकाकरण व इलाज की मांग की है।

सुपौल : राघोपुर में एफएमडी का कहर, परेशान पशुपालकों ने विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप

राघोपुर, एक प्रतिनिधि। राघोपुर प्रखंड क्षेत्र की बिशनपुर दौलत पंचायत स्थित वार्ड 6 और 7 में इन दिनों खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) बीमारी ने कहर बरपा रखा है। दर्जनों पशु इस गंभीर संक्रामक बीमारी की चपेट में आ गए हैं, जिससे पशुपालकों में हड़कंप मचा हुआ है।

पशुपालकों का आरोप

पशु मालिकों ने पशु स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए पशु चिकित्सा पदाधिकारी पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं पशुपालकों का कहना है कि उनके मवेशियों में एफएमडी जैसी संक्रामक बीमारी तेजी से फैल रही है, जो गाय और भैंस दोनों को अपनी चपेट में ले रही है। यह बीमारी न केवल दूध उत्पादन को घटाती है, बल्कि समय पर इलाज न मिलने पर पशु की मौत का कारण भी बन सकती है।

टीकाकरण की कमी

पशु चिकित्सा विभाग द्वारा एफएमडी का टीकाकरण नियमित रूप से किया जाना चाहिए, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग इस दिशा में पूरी तरह उदासीन है। स्थानीय ग्रामीणों सुनील गोहितमान, शुकदेव शर्मा, सुनील यादव, उमेश गोहितमान, शिवनन्दन, गोहितमान, सदानन्द यादव, जयराम गोहितमान, बिनोद शर्मा, राजेन्द्र शर्मा, हरदेव शर्मा, सुनील शर्मा, चन्दन शर्मा समेत दर्जनों लोगों ने बताया कि इस बीमारी की सूचना कई बार पशु चिकित्सा विभाग को दी, लेकिन अब तक न तो कोई टीकाकरण अभियान चलाया गया और न ही बीमार पशुओं का समुचित इलाज हुआ।

पशुपालकों की आर्थिक स्थिति

इलाज के अभाव में कई पशु गंभीर रूप से बीमार पड़े हैं, जिससे उनकी जान पर बन आई है। पीड़ित पशुपालकों ने आरोप लगाया कि विभाग की लापरवाही के कारण उनकी आजीविका खतरे में पड़ गई है। पशुपालन ही उनकी आय का मुख्य स्रोत है और बीमार पशुओं के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

सरकार से मांग

उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर प्रभावित क्षेत्र में टीकाकरण कराने और बीमार पशुओं का इलाज शुरू कराने की मांग की है। वही पशुपालकों को अब विभागीय कार्रवाई का इंतजार है, ताकि इस बीमारी पर काबू पाया जा सके और आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सके। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रशासन उनकी समस्याओं पर ध्यान देगा और जल्द से जल्द उचित कदम उठाएगा।

पशु चिकित्सा विभाग की प्रतिक्रिया

पशुपालन पदाधिकारी डॉ. प्रमोद सिंह ने कहा कि राघोपुर में एफएमडी के प्रकोप की जानकारी मिली है। जांच-पड़ताल की जा रही है। जल्द ही स्थिति नियंत्रण में होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफएमडी बीमारी का क्या प्रभाव है?
यह बीमारी न केवल दूध उत्पादन को घटाती है, बल्कि समय पर इलाज न मिलने पर पशु की मौत का कारण भी बन सकती है।
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