Supaul News: सुपौल : झूलनोत्सव की शुरुआत, पांच दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी के जयकारों से गूंजेगा सुपौल
Supaul News: सुपौल में झूलन महोत्सव की शुरुआत हुई, जो पांच दिनों तक चलेगा। पहले दिन भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ और भगवान श्रीकृष्ण को झूला पर स्थापित किया गया। इस महोत्सव में कई प्रसिद्ध कलाकार भाग लेंगे और भक्ति जागरण कार्यक्रम भी होगा।

Supaul News: सुपौल, वरीय संवाददाता। जिला मुख्यालय स्थित श्री राधा-कृष्ण ठाकुरबाड़ी में रविवार से पांच दिवसीय झूलन महोत्सव की शुरुआत हुई। इस क्रम में पहले दिन शाम में हर महीने एकादशी के मौके पर आयोजित होने वाले भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। देर शाम में गाजे-बाजे के साथ भगवान श्रीकृष्ण को झूला पर स्थापित किया गया।
कार्यक्रम की जानकारी
इस बाबत मंदिर संचालन समिति के सदस्य पवन अग्रवाल ने बताया कि झूलन महोत्सव की शुरुआत हो गई है। पहले दिन स्थानीय कलाकारों से गाए भजन-कीर्तन से माहौल भक्तिमय रहा। महोत्सव शुक्रवार तक चलेगा। जबकि सोमवार से महोत्सव में और चार चांद लग जाएगा। उन्होंने बताया कि पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में 27 और 28 अगस्त को पटना के शैलेश दुबे, मुंबई की ग Ginnni Kaur और कोलकाता की रिंकी गुप्ता समेत कई मशहूर कलाकार कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय समूह का प्रदर्शन
पांच दिवसीय इस झूलनोत्सव कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की अंतरराष्ट्रीय ग्रुप सोनाली तरुण चोपड़ा एंड ग्रुप के सदस्य मनमोहक झांकी की प्रदर्शन करेंगे। इस क्रम में भगवान श्रीकृष्ण-गोपियों व राधा रानी पर आधारित झांकी की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके अलावा समूह के सदस्य समूह नृत्य की भी प्रस्तुति देंगे। इसको लेकर मंदिर संचालन समिति के सदस्यों ने तैयारी पूरी कर ली है।
आयोजन को ऐतिहासिक बनाना
इस बाबत समिति के सचिव प्रमोद अग्रवाल ने बताया कि हर बार की तरह इस बार भी इस आयोजन को बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। कार्यक्रम में पूरे कोसी-सीमांचल व नेपाल के इलाके के श्रद्धालु भी शिरकत करते हैं। इसलिए उसी अनुसार तैयारी भी की जा रही है। संचालन समिति के सचिव प्रमोद अग्रवाल ने बताया कि यह आयोजन पिछले 50 वर्षों से इस मंदिर में आकर्षक तरीके से मनाया जाता रहा है। इसे देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं। यह आयोजन पांच दिनों तक चलेगा। इस दौरान हर दिन अलग-अलग स्वरूपों में सजावट की जाती है। इसके अलावा भक्ति जागरण का कार्यक्रम भी होगा। वहीं मंदिर संचालन समिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने को लेकर कई उप समितियां बनाई हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में यहां इस मौके पर मेला लगता था, बीच में कुछ समय के लिए इसमें थोड़ी कमी आई। लेकिन एक बार फिर से सुपौल के इस ऐतिहासिक आयोजन में लगातार चार चांद लग रहे हैं।


