सुपौल : 17 साल बाद भी नहीं बना कुसहा त्रासदी में ध्वस्त नहर का साइफन, परेशानी
छातापुर के माधोपुर पंचायत में 2008 की कुशहा त्रासदी में ध्वस्त हुए 29 आरडी सायफन की मरम्मत नहीं हो पाई है। इस वजह से तीन पंचायतों के किसानों को सिंचाई की सुविधा नहीं मिल रही है। स्थानीय लोग बताते हैं कि हर वर्ष बरसात में सायफन टूट जाता है, जिससे फसलें बर्बाद होती हैं। स्थायी समाधान की कमी से किसान परेशान हैं।
छातापुर, एक प्रतिनिधि। माधोपुर पंचायत के सीमावर्ती पंचायत स्थित लालपुर वितरणी नहर के 29 आरडी साइफन साल 2008 की कुशहा त्रासदी में ध्वस्त हो गए थे। उक्त ध्वस्त हुए सायफन का आज 17 साल बीत गया। इसके बाद भी आज तक उसकी मरम्मत नहीं हो पाई है। इस कारण तीन पंचायत के किसानों को पटवन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। लोगों का कहना है कि जब भी जन शिकायत होती है तो थोड़ा बहुत कार्य करके केवल मरम्मती कार्य का कोरम को पूरा कर दिया जाता है। इसके कारण महीने दो महीने में ही स्थिति फिर से सायफन की वही हो जाती है।
इसलिए इसकी गुणवत्ता पूर्ण विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में मरम्मती की आवश्यकता है। जानकारी अनुसार कोशी-पूर्वी बड़ी मेन केनाल से निकली चैनपुर-लालपुर वितरणी नहर की लंबाई करीब 30 किलोमीटर है। यह केनाल से ठूठी, भीमपुर, जीवछपुर, माधोपुर, रामपुर, झखाड़गढ़ और पड़ोसी जिले के अररिया के बरदाहा पंचायत होकर यह गुजरती है। जिससे उक्त पंचायत की हजारों हेक्टेयर उपजाऊ जमीन की सिंचाई लगभग होती थी। अभी भी यह नहर जीवछपुर पंचायत तक लगभग दुरुस्त है। इसके बाद तीन पंचायत माधोपुर, रामपुर, झखाड़गढ़ पंचायत की सिंचाई में 29 आरडी साइफन बाधक बना है। वहीं 29 आरडी के बाद दर्जनों जगह नहर के दोनों साइड के बांध टूटा हुआ है। जिसका निर्माण कुसहा त्रासदी के 17 साल बाद भी नहीं हो पाया है। हालांकि साल 2017 में कोसी परियोजना के तहत सिंचाई विभाग के लिए कामधेनु बना यह साइफन का निर्माण तो नहीं हुआ। लेकिन बांध मरम्मत के नाम पर विभाग ने लाखों की राशि जरूर डकार ली। ऐसा जानकारों का कहना है। लोगों ने बताया कि इस इलाके के किसानों की मानें तो सरकार भले ही किसानों के हित की बड़ी-बड़ी बातें और दावे करती है। लेकिन यहां धरातल पर किसानों को सुविधा प्रदान करने के नाम पर किया गया कार्य का नतीजा ढाक के तीन पात ही साबित होता रहा है। स्थानीय किसानों की मानें तो छातापुर प्रखंड की माधोपुर पंचायत स्थित लालपुर वितरणी नहर पर बना साइफन हर साल बरसात के मौसम में जुलाई से अगस्त महीने के बीच में टूट जाता है। इससे किसानों का हजारों एकड़ में लगी फसल बर्बाद हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बरसात के बाद लाखों की लागत से साइफन और खंडित बांध का निर्माण तो किया जाता है। लेकिन स्थायी समाधान के प्रति विभागीय पहल नहीं हो पा रही है। नतीजतन, स्थिति जस की तस बनी रह जाती है। किसान विरेन्द्र सिंह, प्रमोद सहनी, पशुपतिनाथ झा, हेमेंद्र मंडल, सचिन यादव, रहमत अली, रामानंद राम, सफी अहमद, सरयुग प्रसाद मंडल, इजाजुल खां, रामी मंडल, राजेन्द्र प्रसाद आदि ने बताया कि यह साइफन विभागीय कर्मियों के लिए कामधेनु बनी हुई है। बताया उक्त नहर निर्माण के समय जो पुल का निर्माण हुआ था वो बाढ़ के बाद जीर्णशीर्ण अवस्था में है। जिसपर विभाग का ध्यान आकृष्ट नहीं हो रहा है। गौरतलब है कि इस जर्जर साइफन के कारण तीन पंचायत के हजारों किसानों को प्रत्येक साल नुकसान पहुंचाता है। बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। इस बाबत सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता (बीरपुर डिविजन) राजेश कुमार ने बताया कि 29 आरडी के पास सायफन निर्माण को लेकर विभाग को एस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। अनुमति मिलने के बाद काम शुरू कराया जाएगा। लगभग कार्य की सभी प्रक्रिया पूरी है। फंड क्रिएट होते ही कार्य को गति दी जाएगी।

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