सुपौल : केसीसी की जटिल प्रक्रिया से किसान परेशान, बटाईदार वंचित रह रहे लाभ से
किसान क्रेडिट कार्ड योजना को जमीनी स्तर पर जटिल प्रक्रियाओं के कारण मुश्किलें आ रही हैं, जिसके कारण किसान ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने को मजबूर हैं। केसीसी का लाभ लेने के लिए किसानों को भूस्वामित्व प्रमाणपत्र अनिवार्य है, लेकिन बटाईदारी पर खेती करने वाले किसानों के लिए इसे प्राप्त करना मुश्किल है।

कुनौली, निज प्रतिनिधि। किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाने के लिए शुरू की गई किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना जमीनी स्तर पर जटिल प्रक्रियाओं के कारण प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है। परिणामस्वरूप किसान अभी भी पांच रुपये प्रति सैकड़ा जैसे ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने को मजबूर हैं।
किसानों की मुश्किलें
जानकारी के अनुसार केसीसी का लाभ लेने के लिए किसानों को भूस्वामित्व प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना पड़ता है। इसी प्रक्रिया के आधार पर बैंक ऋण स्वीकृत करता है। लेकिन क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान या तो सीमित जमीन के मालिक हैं या बटाईदारी पर खेती करते हैं, जिससे उनके लिए यह प्रमाणपत्र बनवाना लगभग असंभव हो जाता है। जिले की लगभग 90 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है, जिसमें 40 से 50 प्रतिशत किसान बटाईदारी पर खेती करते हैं।
किसानों की राय
ऐसे किसान जमीन के मालिक नहीं होने के कारण केसीसी का लाभ नहीं उठा पाते। नतीजतन वे न केवल ऋण से वंचित रहते हैं, बल्कि डीजल अनुदान और फसल क्षति मुआवजा जैसी सरकारी योजनाओं से भी बाहर रह जाते हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि जमीन मालिक अपने नाम से केसीसी बनवाकर बैंक से राशि प्राप्त कर लेते हैं, जबकि वास्तविक खेती करने वाले बटाईदार किसान पूरी तरह उपेक्षित रह जाते हैं।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का पक्ष: इस संबंध में सीओ विजय प्रताप सिंह ने बताया कि बटाईदारी पर खेती करने वाले किसानों के लिए बटाईदारी प्रमाणपत्र आवश्यक है। इसके बिना नियमों के अनुसार केसीसी का लाभ देना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रावधानों के तहत ही कार्रवाई की जाती है।
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