सुपौल : सदर प्रखंड में नल जल योजना है फ्लॉप, कैसे बुझेगी लोगों की प्यास
सुपौल के सदर प्रखंड में नल-जल योजना पूरी तरह से विफल साबित हो रही है। विभागीय लापरवाही के कारण कई पंचायतों में शत-प्रतिशत काम पूरा नहीं हुआ है, जिससे सैकड़ों परिवारों को शुद्ध पेयजल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें की हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।

अंजनी कुमार झा, सुपौल। सरकार लोगों के सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के लिए भले ही संकल्पित हो लेकिन विभागीय कर्मियों व संवेदकों की उदासीनता के कारण विकास कार्य काफी दूर दिखाई पड़ता है। मामला सदर प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों का है। यहां नल-जल योजना पूरी तरह से फ्लॉप साबित हो रही है। जानकारी के मुताबिक सदर प्रखंड में कई पंचायतें हैं जहां शत-प्रतिशत नल जल योजना का कार्य पूरा नहीं होने से सैकड़ों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। लोगों की मानें तो विभाग द्वारा आधा-अधूरा पाइप बिछाकर योजना को लंबित रखने के कारण लोगों को समुचित पेयजल की सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है।
इस बाबत स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सदर प्रखंड में कई ऐसे गांव हैं, जहां विभाग द्वारा अधूरा कार्य किया गया है। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि विभाग द्वारा जहां कार्य किया भी किया गया है तो वहां नल से पानी वर्षों से नहीं टपक रहा है। इसकी शिकायत कई बार विभाग के अधिकारी और संवेदकों से की गई, लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया गया। कई बार तो ऐसा देखा गया है की संवेदकों के मुंशी अपने निजी आदमी के घर तक पाइप बिछाते भी हैं, लेकिन उनके पड़ोसियों को वर्षों से पाइप लाइन बिछाने का इंतजार अभी भी करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीण गजेंद्र सिंह, उमेश सिंह, रामजी कामत, हरिभजन कामत, विजय कुमार वर्मा, सत्यनारायण महतो, रामभजन कामत, भवेश वर्मा, रामभजन कामत व रामू कामत आदि ने बताया कि कई जगह पाइप लाइन बिछाकर पानी भी आया, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद पानी टपकना बंद हो गया। इसकी शिकायतें कई बार की गई, लेकिन उसकी सुध किसी ने भी नहीं ली। विभाग या संवेदकों को समस्या बताने पर एक सप्ताह से महीने भर का आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि सभी परेशानियों की जानकारी विभाग को है, लेकिन उसके बावजूद भी उनके कानों तक आवाज नहीं जा रही है। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने यह भी बताया कि हल्के-फुल्के काम के लिए भी संबंधित संवेदकों को अगर सूचना दी जाती है तो व्यक्ति विशेष लोगों के काम तुरंत कर दिए जाते हैं, लेकिन साधारण तबके के लोगों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। इस समस्या से परेशान सदर प्रखंड स्थित ग्रामीण क्षेत्र के जगतपुर वार्ड सात, बरुआरी आंशिक वार्ड, कजरा आंशिक, सोनक वार्ड छह, वीणा पंचायत व एकमा आदि कई गांवों स्थित वार्ड के लोग अभी भी शुद्ध पेयजल के लिए टकटकी लगाए बैठे हैं। बिहार सरकार ने ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपए की लागत से नल -जल योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य था कि गांव के हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंच सके और लोगों को दूषित पानी पीने से होने वाली गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिले, जिसके कारण कई जगहों पर अलग-अलग वार्डों में टंकी लगाकर पाइपलाइन बिछाया गया। इसके बाद कनेक्शन भी दिए गए, लेकिन आधा-अधूरा योजना का काम होने के कारण शत-प्रतिशत लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका है। ग्रामीण गजेंद्र सिंह, उमेश सिंह, रामजी कामत, हरिभजन कामत समेत दर्जनों लोगों ने बताया कि सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी लोग पानी के लिए तरस रहे हैं, यह योजना की विफलता उजागर करता है। पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता विकाश कुमार सिंह ने कहा कि उक्त परेशानी को लेकर जांच शुरू कर दी गई है जिसके तहत कई जगहों पर कार्य शुरू भी कर दिया गया है हालांकि कुछ जगहों पर हो रही परेशानियों को भी बहुत जल्द ही दूर कर लिया जाएगा इसके लिए कर्मियों को उक्त कार्य में युद्ध स्तर पर लगाकर परेशानी को अविलंब पूरी कर लोगों को समस्या से निजात दिलाई जाएगी ।
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