
सुपौल : सरकारी पोखर पर अतिक्रमण का बढ़ रहा है कब्जा
संक्षेप: त्रिवेणीगंज में नगर परिषद क्षेत्र के ऐतिहासिक सरकारी पोखर पर अतिक्रमणकारियों की नजर पड़ गई है। अवैध निर्माण और मिट्टी भराई के चलते पोखर का अस्तित्व संकट में है। चार साल पहले सौंदर्यीकरण के लिए 35 लाख रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन अब यह कागज़ी संपत्ति बनकर रह गया है।
त्रिवेणीगंज, निज प्रतिनिधि। सरकारी जमीनों के बाद अब अतिक्रमणकारियों की नजर अब नगर परिषद क्षेत्र के तालाबों पर भी पड़ चुकी है। नगर परिषद के हृदयस्थली माने जाने वाले मेला ग्राउंड स्थित ऐतिहासिक सरकारी पोखर जो कभी शहर की पहचान और शान हुआ करता था , आज अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। कभी इस पोखर के चारों ओर बच्चों की किलकारियाँ, मेले की रौनक और जलकुंड की ठंडक दिखती थी। आज वहीं अवैध निर्माण, मिट्टी भराई और दीवारों का जाल बिछ चुका है। सड़क से गुजरने पर अब यह पोखर लोगो को नजर भी नहीं आता हैं। लोग बताते हैं कि कभी यहाँ बड़ी पोखर हुआ करती थी।अब

इसका अस्तित्व मिटने के कगार पर है। जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत इसके सौंदर्यीकरण पर चार साल पूर्व 35 लाख रुपये खर्च कर पक्की सीढ़ियां बनीं, उड़ाही भी हुई लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पातनिकला । अब न तो पोखर का पुराना आकार बचा है, न ही सौंदर्य का कोई निशान। स्थानीय निवासी जयप्रकाश यादव कहते हैं कि पोखर के चारों ओर अस्थाई और स्थाई मकान लगातार बन रहे हैं। भूमाफिया खुलेआम सरकारी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। अब पीछे के मोहल्ले के लोगों को मुख्य मार्ग तक पहुँचने में तकलीफ होती है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने शुरुआती दौर में ही सजगता दिखाई होती तो स्थिति यह नहीं होती। अब तो अतिक्रमण हटाना मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालने जैसा हो चुका है। आश्चर्यजनक पहलू है कि राजस्व कचहरी के ठीक आगे अवस्थित यह सरकारी पोखर अब कागज़ी संपत्ति बनकर रह गया है। सीमा और रकबा तक लोगों को याद नहीं। अधिकारी कभी मापी की बात करते हैं, तो कभी कार्रवाई की लेकिन ज़मीन पर बदलाव शून्य है। अंचल अधिकारी प्रियंका सिंह ने कहा कि जल्द ही मापी कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

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