अस्पताल से डॉक्टर नदारद, गार्ड-एंबुलेंस चालक कर रहे इलाज

Newswrap हिन्दुस्तान, सुपौल
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राघोपुर रेफरल अस्पताल में देर रात डॉक्टर और अन्य स्टाफ मौजूद नहीं थे, जिसके कारण मरीजों को सुरक्षा गार्ड और एंबुलेंस चालक द्वारा इलाज किया गया। एक मरीज, अजय कुमार, दर्द के कारण घंटों परेशान रहा। अस्पताल प्रभारी ने सुरक्षा गार्ड द्वारा पर्चा बनाने को गलत बताया और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

अस्पताल से डॉक्टर नदारद, गार्ड-एंबुलेंस चालक कर रहे इलाज

राघोपुर, एक प्रतिनिधि। राघोपुर रेफरल अस्पताल में देर रात न डॉक्टर मौजूद रहते हैं और न ही कंपाउंडर। इतना ही नहीं अस्पताल का कोई अन्य स्टाफ भी मौजूद नहीं रहता। आलम यह है कि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का इलाज अस्पताल के सुरक्षा गार्ड और डायल 102 एंबुलेंस के चालक कर रहे हैं। ऐसे में अस्पताल आने वाले मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ताजा मामला शुक्रवार देर रात करीब दो बजे का है। जानकारी के अनुसार राघोपुर प्रखंड क्षेत्र के धरहरा वार्ड 13 निवासी भूपेश यादव के पुत्र अजय कुमार (35 वर्ष) को परिजनों ने पेट दर्द की शिकायत के बाद रेफरल अस्पताल लाया।

डॉक्टर की अनुपस्थिति

लेकिन डॉक्टर व अन्य किसी भी अस्पताल स्टाफ के मौजूद नहीं रहने के कारण मरीज घंटों छटपटाता रहा। इस बाबत मरीज के भाई संजय कुमार ने बताया कि जब वह अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर का चैंबर खाली था। दो सुरक्षा गार्ड इमरजेंसी ओपीडी रूम के बरामदे पर मोबाइल देख रहे थे, जबकि एक अन्य गार्ड अशोक कुमार भी इमरजेंसी ओपीडी रूम के एक बेड पर लेटकर मोबाइल देखने में व्यस्त थे। संजय ने बताया कि उनके भाई दर्द से तड़प रहे थे, लेकिन डॉक्टर का कोई अता-पता नहीं था।

इमरजेंसी में इलाज

इस बीच अस्पताल के सुरक्षा गार्ड मुकेश ठाकुर ने मरीज का पर्चा काटा और उन्हें डॉक्टर को ढूंढने के लिए कहा। संजय ने बताया कि जब उन्होंने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया, तब कुछ देर बाद डॉक्टर अंजार अहमद अस्पताल आए। डॉक्टर ने पर्चा देखा, दवा और इंजेक्शन लिखकर फिर से सोने चले गए। इसके बाद रेफरल अस्पताल में डायल 102 एम्बुलेंस के चालक कृष्णा कुमार ने उनके भाई को इंजेक्शन दिया और पानी का बोतल भी लगाया। इंजेक्शन लगने के बाद अजय को थोड़ी राहत मिली, लेकिन कुछ देर बाद दर्द फिर तेज हो गया। जब वे दोबारा सुरक्षा गार्ड के साथ डॉक्टर के पास गए, तो डॉक्टर सो रहे थे। उन्हें जगाने पर डॉक्टर ने पर्चा लिया और बिना जांच किये ही मरीज को बाहर ले जाने को कहकर रेफर कर दिया।

अस्पताल प्रबंधन की प्रतिक्रिया

इसके बाद डायल 102 एम्बुलेंस चालक कृष्णा कुमार ही डायल 102 एम्बुलेंस से मरीज अजय कुमार को हायर सेंटर सुपौल ले गए, जहां उनका इलाज चल रहा है। संजय ने यह भी बताया कि अस्पताल में कंपाउंडर का काम करने वाले व्यक्ति ने ही डायल 102 एम्बुलेंस चलाकर उनके भाई को सुपौल पहुंचाया। इधर, इस पूरे प्रकरण को लेकर राघोपुर रेफरल अस्पताल प्रभारी डॉ दीप नारायण राम ने बताया कि शुक्रवार की रात डॉ नीलेश प्रधान की ड्यूटी थी। उन्होंने बताया कि रात के समय में अगर इमरजेंसी ओपीडी में कोई मरीज नहीं होता है तो ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर नए 50 बेड के अस्पताल के एक कमरे में बने सोने वाले रूम में सो सकता है। जबकि इमरजेंसी मरीज के आने पर डॉक्टर मरीज का इलाज करते हैं। उन्होंने बताया कि डायल 102 एम्बुलेंस पर कार्यरत टीएमटी (टेक्निकल मेडिकल टीम) के सदस्य ने मरीज को इंजेक्शन दिया है। हालांकि उन्होंने सुरक्षा गार्ड द्वारा मरीज का पर्चा बनाने को गलत ठहराया। अस्पताल प्रभारी ने कहा कि सुरक्षा गार्ड का काम मरीज का पर्चा बनाना नहीं है। यह गलत हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच-पड़ताल कर संबंधित लोगों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या राघोपुर रेफरल अस्पताल में डॉक्टर मौजूद थे?
नहीं, राघोपुर रेफरल अस्पताल में देर रात डॉक्टर मौजूद नहीं थे।

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